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मुरली बाज रही मधुबन में टूटा शिव शंकर का ध्यान || murli baj rahi madhuban mein tuta shiv shankar ka dhyan
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 6 दिसंबर 2023
भजन का अर्थ
यह भजन मधुबन में बजती कृष्ण की मुरली की तान का ऐसा वर्णन करता है, जिससे स्वयं शिव शंकर का ध्यान भी भंग हो जाता है। भजन प्रश्न करता है कि भोले बाबा ऊँचे पर्वत (कैलाश) पर हैं और घनश्याम गोकुल में — फिर भी मुरली की धुन शिव तक पहुँचकर उनका ध्यान तोड़ देती है।
यह भजन कृष्ण के संगीत की उस अलौकिक शक्ति को दर्शाता है जो दूर कैलाश में तपस्यारत शिव तक को भी अपनी ओर खींच लेती है — यानी शिव और कृष्ण भक्ति का यह मिलन भजन दोनों देवताओं के प्रति समान श्रद्धा दिखाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन जन्माष्टमी और सावन के महीने में गाया जाता है, जब भक्त शिव और कृष्ण दोनों की भक्ति एक साथ व्यक्त करना चाहते हैं।
भजन-कीर्तन और सत्संग में भी इसे कृष्ण की बांसुरी और शिव की तपस्या के मेल के रूप में गाया जाता है।
भजन के बोल
मुरली बाज रही मधुबन में टूटा शिव शंकर का ध्यान........
शिव शंकर का ध्यान मेरे शिव शम्भू का ध्यान |
कहा रहे मेरे भोले बाबा कहा रहे घनश्याम
ऊचे पर्वत भोले बाबा गोकुल में घनश्याम
मुरली बाज रही.......
क्या पहने मेरे भोले बाबा क्या पहने घनश्याम
मृगशाला मेरे भोले बाबा पिला पीतांबर घनश्याम
मुरली बाज रही........
क्या बजायें मेरे भोले बाबा क्या बजायें घनश्याम........
डमरू बजाये मेरे भोले बाबा मुरली बजाये घनश्याम
मुरली बाज रही......
किसके संग मेरे भोले बाबा किसके संग घनश्याम
गौरा संग मेरे भोले बाबा राधा संग घनश्याम
मुरली बाज रही........
क्या खाये मेरे भोले बाबा क्या खाये घनश्याम
भांग धतूरा मेरे भोले बाबा माखन घनश्याम
मुरली बाज रही.........
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