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मुरली बाज रही मधुबन में टूटा शिव शंकर का ध्यान || murli baj rahi madhuban mein tuta shiv shankar ka dhyan
Krishna Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में मधुबन में कृष्ण की मुरली बजने से शिव शंकर का ध्यान टूट जाता है। भोले ऊँचे पर्वत पर और घनश्याम गोकुल में — दोनों की तुलना है। भोले मृगशाला पहनते हैं तो कृष्ण पीला पीतांबर, भोले डमरू बजाते हैं तो कृष्ण मुरली, भोले गौरा के संग हैं तो कृष्ण राधा के। यह भजन शिव और कृष्ण के स्वरूपों की सुंदर तुलना और उनकी दिव्य लीलाओं का वर्णन करता है।
भजन के बोल
मुरली बाज रही मधुबन में टूटा शिव शंकर का ध्यान........
शिव शंकर का ध्यान मेरे शिव शम्भू का ध्यान |
कहा रहे मेरे भोले बाबा कहा रहे घनश्याम
ऊचे पर्वत भोले बाबा गोकुल में घनश्याम
मुरली बाज रही.......
क्या पहने मेरे भोले बाबा क्या पहने घनश्याम
मृगशाला मेरे भोले बाबा पिला पीतांबर घनश्याम
मुरली बाज रही........
क्या बजायें मेरे भोले बाबा क्या बजायें घनश्याम........
डमरू बजाये मेरे भोले बाबा मुरली बजाये घनश्याम
मुरली बाज रही......
किसके संग मेरे भोले बाबा किसके संग घनश्याम
गौरा संग मेरे भोले बाबा राधा संग घनश्याम
मुरली बाज रही........
क्या खाये मेरे भोले बाबा क्या खाये घनश्याम
भांग धतूरा मेरे भोले बाबा माखन घनश्याम
मुरली बाज रही.........