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उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसी वाले | Utha Do Meri Matki O Bansi Wale Krishna Bhajan Lyrics
Krishna Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में एक गोपी कृष्ण से शिकायत करती है कि उन्होंने औरों की मटकी उठाई, गैया चराई, माखन खाया, चूनर ओढ़ाई और नैया पार लगाई — पर उसकी क्यों नहीं। मटकी छीके में अटकी है, चूनर झड़ी अटकी है और नैया भँवर में फँसी है। यह भजन गोपी का कृष्ण से प्रेमपूर्ण उलाहना और उनसे विशेष ध्यान पाने की लालसा को व्यक्त करता है।
भजन के बोल
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसी वाले.......
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसी वाले.......
ओ बंसी वाले, ओ मुरली वाले (2)
औरो की तूने मटकी उठाई....... (2)
हमारी काहे पटकी,ओ बंसी वाले........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो की तूने गैया चराई ...... (2)
मेरी कहे भटकी,ओ बंसी वाले ........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो का तूने माखन खाया...... (2)
मेरी मटकी छीके लटकी........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो को तूने चूनर ओढ़ायी..... (2)
मेरी चूनर झड़ी अटकी ओ बंसी वाले.......
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो की नैया पार लगाई ..... (2)
मेरी क्यू भवर अटकी ओ बंसी वाले ........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||