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उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसी वाले | Utha Do Meri Matki O Bansi Wale Krishna Bhajan Lyrics
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
इस भजन में एक गोपी प्रेमपूर्ण उलाहने के साथ कृष्ण से पूछती है कि उन्होंने औरों की मटकी उठाई, गैया चराई, माखन खाया और चूनर ओढ़ाई - फिर उसकी बारी क्यों नहीं आई।
यह भजन भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय, सखा-भाव वाले प्रेम-संबंध को मार्मिक ढंग से दर्शाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन जन्माष्टमी और रासलीला जैसे कृष्ण-भक्ति उत्सवों में गाया जाता है।
भजन के बोल
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसी वाले.......
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसी वाले.......
ओ बंसी वाले, ओ मुरली वाले (2)
औरो की तूने मटकी उठाई....... (2)
हमारी काहे पटकी,ओ बंसी वाले........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो की तूने गैया चराई ...... (2)
मेरी कहे भटकी,ओ बंसी वाले ........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो का तूने माखन खाया...... (2)
मेरी मटकी छीके लटकी........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो को तूने चूनर ओढ़ायी..... (2)
मेरी चूनर झड़ी अटकी ओ बंसी वाले.......
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
औरो की नैया पार लगाई ..... (2)
मेरी क्यू भवर अटकी ओ बंसी वाले ........
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले ||
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