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जब निकले कन्हैया मेरी सांस रे चले आना मुरारी मेरे पास रे | Jab Nikle Kanhaiya Meri Sans | Janmashtami Bhajan Lyrics
Krishna Bhajan
भजन का अर्थ
यह अत्यंत भावुक भजन एक भक्त की अंतिम इच्छा है कि मृत्यु के समय कृष्ण-मुरारी उसके पास आएँ। यमराज के आने पर, अर्थी के उठने पर, मरघट में आग लगाते समय और बच्चों के रोते समय — हर पल कान्हा साथ रहें। यह भजन मृत्यु की वास्तविकता को स्वीकार करते हुए ईश्वर की शरण में जाने का संदेश देता है। जीवन के अंतिम क्षण में भी भगवान की याद रखने की यह प्रेरणा है।
भजन के बोल
जब निकले कन्हैया मेरी सांस रे चले आना मुरारी मेरे पास रे
जब निकले कन्हैया मेरी सांस रे चले आना मुरारी मेरे पास रे
जब अंत समय मेरा आएगा, यमराज मुझे लेने आएगा......
तुम्हें पाऊ खड़ा अपना पास रे, चले आना मुरारी मेरे पास रे....
जब घर कांधे पे जाउंगी, में कुछ भी बोल ना पाउंगी.........
तुम चल देना मेरे साथ रे, चले आना मुरारी मेरे पास रे....
जब मरघट बिच पड़ी होगी, लकड़ी के बिच फंसी होगी..........
जब तू ही लगना मुझे आग रे, चले आना मुरारी मेरे पास रे........
जब बच्चे मेरे बिलखेंगे, वोटो रो रो रूडन मचायेगे........
तू बधायो उनकी आस रे, चले आना मुरारी मेरे पास रे........
जब निकले कन्हैया मेरी सांस रे चले आना मुरारी मेरे पास रे
जब निकले कन्हैया मेरी सांस रे चले आना मुरारी मेरे पास रे