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radha muje jamuna ke paar milna || राधा रानी जमुना के पार मिलना
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 3 सितंबर 2023
भजन का अर्थ
यह भजन राधा-कृष्ण के प्रेम-मिलन की कल्पना को यमुना तट के रूप में प्रस्तुत करता है। कृष्ण राधा से यमुना के पार मिलने का वादा करते हुए कहते हैं कि वे मुकुट पहनकर आएँगे और राधा से भी उतना ही श्रृंगार करने का आग्रह करते हैं।
भजन में पीताम्बर और लाल साड़ी जैसे रंगों का मेल राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप के पारंपरिक शृंगार को दर्शाता है, जो भक्ति और प्रेम दोनों का प्रतीक है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन राधाष्टमी, जन्माष्टमी और कृष्ण भजन-कीर्तन में गाया जाता है, विशेषकर जब राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप की झांकी सजाई जाती है।
वृंदावन और बरसाने से जुड़े उत्सवों में भी इसे राधा-कृष्ण के प्रेम का स्मरण कराने के लिए गाया जाता है।
भजन के बोल
राधा रानी जमुना के पार मिलना,
पार मिलना मेरी सरकार मिलना,
राधा रानी जमुना के पार मिलना,
मैं तो आऊंगा राधा मुकुट पहनके,
टीके में तू भी श्रृंगार रखना,
राधा.......
मैं तो आऊंगा राधा पीताम्बर पहनके,
साडी का रंग तू भी लाल रखना,
राधा.......
मैं तो आऊंगा राधा बारात लेके,
सखिया के संग तू तैयार मिलना,
राधा.......
मैं तो आऊंगा राधा रथ में बैठके,
डोली को अपने सजाये रखना,
राधा.......
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