"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"

राखी तुमको बाँधने आई, हे प्रभु दीनदयाल | Rakhi Tumko Bandhne Aayi | Raksha Bandhan Bhajan Lyrics
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह एक अत्यंत सुंदर और भक्तिपूर्ण रक्षाबंधन Rakshabandhan Special भजन है, जिसमें एक भक्त सतगुरु या भगवान दीनदयाल को राखी बांधकर उनके प्रति अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट करता है।
इस भजन में भक्त भगवान से अपने सिर पर दया का हाथ बनाए रखने, प्रेम से बनाई गई राखी स्वीकार करने और हर संकट में लाज बचाने की प्रार्थना करता है। भक्त का भाव है कि उसका और ईश्वर के प्रेम का बंधन राखी के धागों की तरह अटूट रहे और वह हमेशा उनके श्री चरणों से जुड़ा रहे।
भजन के बोल
राखीं तुमकों बाँधनें आई, हे प्रभु दीनदयाल-2,
मेरे सर पें सदा ही रखना, अपनी दया का हाथ-2,
मैं राखीं लेकर आई, हैं रक्षाबंधन आया-2,
प्रीत कें मोती पिरो कें, अरमानों की राखीं सज़ाई-2,
पलकों के धागों सें, (सतगुरु जी) मैनें राखीं बनाई-2,
कर-कमल बढ़ा, मेरे स्वामी-2,
राखीं करना स्वीकार, मैं राखीं लेकर आई, हैं रक्षाबंधन आया-2,
हर युग में प्रभु, तुमनें हम जीवों की लाज बचाई-2,
सचखंम्ड छोड़ के आयें जब, हम पर विपदा आई-2,
जीवन डोरी सौपनें अपमी-2, पास तेरे हूँ आया-2,
मैं राखीं लेकर आई, हैं रक्षाबंधन आया-2.
जैसें जुड़ें हैं प्रभु जी, आपस में राखीं कें धागें-2,
वैसे ही हमें रखना, श्री चरणों से अपने लगाकें-2,
प्रीत का बंन्धन दाता-2, कभी टुट ना पाया-2,
ओ,मैं राखीं लेकर आई, हैं रक्षाबंधन आया-2,
पुन्नं-भागों सें सतगुरु, दिवस ये प्यारां आया-2,
श्री चरणों में भगावनं, राखीं का पर्व मनाया-2,
ये दास श्री चरणों में-2, जायें सदा बलिहार-2,
मैं राखीं लेकर आई, हैं रक्षाबंधन आया-2.......
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए

