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जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे -(Jagannath Chakka Nain Nilachal Vare)
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन भगवान जगन्नाथ जी के प्रति अटूट विश्वास और उनके सुंदर रूप की महिमा को दर्शाता है। गोल और बड़े-बड़े नेत्रों (आँखों) वाले भगवान, जो 'नीलाचल' (उड़ीसा के पुरी धाम) में निवास करते हैं। भगवान जगन्नाथ जी के गोल नेत्र उनकी असीम कृपा और हर भक्त पर नज़र रखने के प्रतीक हैं।
यहाँ भक्त भगवान के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर रहा है। इसका सीधा मतलब है कि 'हे प्रभु! इस संसार में आपके अलावा मेरा और कोई सहारा नहीं है। अगर इस जीवन रूपी नैया को आप नहीं संभालेंगे और अपनी कृपा नहीं करेंगे, तो हमें कौन संभालेगा?'
संक्षेप में, यह भजन भगवान जगन्नाथ के सुंदर रूप का गुणगान करता है और उनसे जीवन में सहारा और सुरक्षा देने की भावपूर्ण प्रार्थना करता है।
भजन के बोल
जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे
जगन्नाथ, जगन्नाथ, चका नैन, चका नैन
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
मेरी ये नैया है अब तो तेरे हवाले
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे...
तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किस किसके द्वारे,
तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किस किसके द्वारे,
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे...
जगन्नाथ स्वामी मेरे नैन के तारे,
मेरे सारे काज स्वामी आप ही संवारे,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे...
शरण तेरी पड़ा रहूं दास बनाले,
तेरी ही सेवा करूं जो चाहे कराले,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे...
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