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श्याम चूड़ी बेचने आया Lyrics | Shyam Chudi Bechne Aaya | Radha Krishna Bhajan
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन किसे समर्पित है और मुख्य भाव क्या है
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की प्रेममयी लीलाओं को समर्पित है। इसमें कृष्ण के मनिहारी का रूप धारण कर राधा को चूड़ियाँ पहनाने की मनोरंजक और भक्तिमय लीला का वर्णन है।
भजन की पंक्तियों का मतलब
श्याम मनिहारी का भेस बनाकर चूड़ियाँ बेचने गलियों में आते हैं।
राधा को जब इस बात का पता चलता है, तो वे ललिता के माध्यम से कृष्ण को बुलाती हैं।
राधा कहती हैं कि उन्हें लाल या हरी चूड़ियाँ नहीं, बल्कि श्याम रंग ही प्रिय है।
कृष्ण स्वयं राधा को चूड़ियाँ पहनाते हैं और दोनों के बीच प्रेमपूर्ण संवाद होता है।
पूरे भजन में राधा-कृष्ण की मधुर, चंचल और प्रेममयी लीला को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन राधा-कृष्ण की भक्ति, सत्संग और भजन-कीर्तन के अवसरों पर गाया जाता है।
राधाष्टमी, जन्माष्टमी और ब्रज की कृष्ण-लीला से जुड़े धार्मिक आयोजनों में ऐसे भजनों का विशेष महत्व है।
इसे राधा-कृष्ण के प्रेम और उनकी मधुर लीलाओं के स्मरण के भाव से गाया जाता है।
भजन के बोल
मनिहारी का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया।
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया॥
झोली कंधे धरी, उसमें चूड़ी भरी,
गलियों में शोर मचाया।
श्याम चूड़ी बेचने आया,
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया॥
राधा ने सुनी, ललिता से कही,
राधा ने सुनी, ललिता से कही।
मोहन को तुरंत बुलाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया॥
चूड़ी लाल नहीं पहनूँ,
चूड़ी हरी नहीं पहनूँ।
मुझे श्याम रंग है भाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया।
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया॥
राधा पहनने लगी,
श्याम पहनाने लगे।
राधा ने हाथ बढ़ाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया॥
राधा कहने लगी,
तुम हो छलिया बड़े।
धीरे से हाथ दबाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया॥
मनिहारी का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया।
छलिया का भेस बनाया,
श्याम चूड़ी बेचने आया॥
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