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हो मेरा वृंदावन ससुराल, मैं दुल्हन नंदलाल की रे Mera Vrindavan Sasural main Dulhan NandLal Ki Re
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
इस भजन में एक भक्त खुद को भगवान श्री कृष्ण (नंदलाल) की दुल्हन मानकर अपनी गहरी भक्ति और खुशी को व्यक्त कर रही है। वह बड़े गर्व से कहती है कि पवित्र वृंदावन ही उसका ससुराल है, माता यशोदा उसकी सास हैं और ब्रज के राजा श्री कृष्ण उसके पति हैं। उसके पति 'सेठों के सेठ' (सबसे बड़े दाता) हैं जो पूरे संसार को संभालते हैं और खुले हाथों से सबको सुख-समृद्धि बांटते हैं। सरल शब्दों में, यह भजन दिखाता है कि भगवान को अपना सर्वस्व मान लेने के बाद भक्त का जीवन परम आनंद और सौभाग्य से भर जाता है।
भजन के बोल
हो मेरा वृंदावन ससुराल, मैं दुल्हन नंदलाल की रे...
हो मेरा वृंदावन ससुराल, मैं दुल्हन नंदलाल की रे...
मेरी जमुना पार हवेली, गोपी है यह सारी सहेली।
मेरे पति है ब्रज को राजा , ना हूं मैं कोई जग में अकेली।
हो मैं तो हो गई देखो निहाल, मैं दुल्हन नंदलाल की रे...
मेरी सास यशोदा मैया, मैं तो पकड़ूं इनकी बईया।
मेरे पति है ग्वाल गाय को, संग में बैठूं इनकी छैया।
हो मेरा भाग्य बड़ा कमाल, मैं दुल्हन नंदलाल की रे...
मेरे पति सेठों को सेठ है, जिसकी लागू मैं सेठानी।
करते ना कोई मुझसे ऐंठ है, बना के राखो रानी।
हो वह तो भर भर बांटे माल, मैं दुल्हन नंदलाल की रे...
नंद बाबा की आंखों का तारा, भक्तों का यह है सहारा।
संतो के यह मन में समाये, भक्त तेरा गुण गाए।
जो सारे जग की कर संभाल, मैं दुल्हन नंदलाल की रे...
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