"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"

सखी री बांके बिहारी से हमारी लड़ गई अंखियाँ | Sakhi Ri Banke Bihari Se Hamari Lad Gayi Ankhiya | कृष्ण भजन लिरिक्स
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन श्री बांके बिहारी (श्री कृष्ण) को समर्पित है। इसमें भक्त के मन में कृष्ण की मोहक छवि और प्रेममयी चितवन के कारण उत्पन्न गहरे भक्ति-भाव और कृष्ण-प्रेम का वर्णन है।
[भजन की पंक्तियों का मतलब — हर अंतरे/हिस्से में क्या कहा गया है, 4-6 पंक्तियाँ]
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
भक्त कहता है कि बांके बिहारी से उसकी आँखें मिल गईं, जिसे रोकने का उसने बहुत प्रयास किया, लेकिन अंततः वह कृष्ण के प्रेम में पड़ गया।
कृष्ण की मोहिनी छवि और दृष्टि ऐसी है कि आँखें उनसे हटती ही नहीं हैं।
उनकी चितवन चारों दिशाओं से रस बरसाती हुई भक्त के मन को अपनी ओर खींच लेती है।
कृष्ण की यह छवि मन के मंदिर में मणि की तरह गहराई से बस गई है, जिसे जीवन समाप्त होने पर भी भुलाया नहीं जा सकता।
इससे जुड़ी मान्यता
यह भजन श्री कृष्ण की भक्ति, प्रेम और उनकी मनमोहक छवि का स्मरण करने के लिए गाया जाता है।
इसे कृष्ण जन्माष्टमी, श्री कृष्ण पूजा, मंदिरों में भजन-कीर्तन तथा राधा-कृष्ण के भक्ति आयोजनों में गाया जा सकता है।
इसके अलावा इसे सामान्य रूप से कृष्ण-प्रेम और भक्ति में भी गाया जाता है।
भजन के बोल
सखी री बांके बिहारी से
हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
बचायी थी बहुत लेकिन
निगोड़ी लड़ गयी अखियाँ ॥
ना जाने क्या किया जादू
यह तकती रह गयी अखियाँ ।
चमकती हाय बरछी सी
कलेजे गड़ गयी आखियाँ ॥
चहू दिश रस भरी चितवन
मेरी आखों में लाते हो ।
कहो कैसे कहाँ जाऊं
यह पीछे पद गयी अखियाँ ॥
भले तन से निकले प्राण
मगर यह छवि ना निकलेगी ।
अँधेरे मन के मंदिर में
मणि सी गड़ गयी अखियाँ ॥
सखी री बांके बिहारी से
हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
बचायी थी बहुत लेकिन
निगोड़ी लड़ गयी अखियाँ ॥
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए

