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मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला || Murli jor ki bajai re nand laala Bhajan Lyrics
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन नंदलाला (कृष्ण) की मुरली की मोहक तान का वर्णन करता है, जिसे सुनकर राधा बरसाने से दौड़ी चली आती हैं और मीरा वृंदावन में उसी धुन पर अपनी प्रीत लगा बैठती हैं।
भजन यह भाव जगाता है कि कृष्ण की बांसुरी की आवाज़ केवल संगीत नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति को खींच लाने वाली दिव्य पुकार है, जो राधा और मीरा जैसी भक्तों के हृदय को बरबस अपनी ओर खींच लेती है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन जन्माष्टमी, कृष्ण भजन-कीर्तन और राधा-कृष्ण की रासलीला से जुड़े उत्सवों में गाया जाता है, जब भक्त मुरली की मधुर तान और कृष्ण के प्रेम-स्वरूप का स्मरण करते हैं।
फाल्गुन और वसंत के होली-उत्सवों में भी वृंदावन-बरसाने से जुड़े कृष्ण भजनों के साथ इसे गाया जाता है।
भजन के बोल
मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला,
नन्द लाला ओ गोपाला,
मुरली की आवाज राधे बरसाने सुनी थी,
राधे दोड़ती चली आई रे नंदलाला,
मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला
मुरली की आवाज मीरा वृन्दावन सुनी थी,
प्रीत मीरा ने लगाई रे नन्द लाला,
मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला
मुरली की आवाज गोपियाँ यमुना पे सुनी थी,
गोपियाँ खींची चली आई रे नन्द लाला,
मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला
मुरली की आवाज भक्त नरसी ने सुनी थी,
लाज तूने ही बचाई रे नन्द लाला,
मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला
मुरली की आवाज सुदामा ने सुनी थी,
यारी तुह्ने ही निभाई रे नंदलाला,
मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला,
मुरली की आवाज तेरे भक्तो ने सुनी थी,
नैया पार तू लगाई दे नन्द लाला,.
मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए

