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कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे || Kaisi Bajai Bansuriya O Mohan Bhajan Lyrics
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 4 सितंबर 2023
भजन का अर्थ
यह भजन कृष्ण की बांसुरी की उस अलौकिक धुन का वर्णन करता है जिसे सुनकर स्वयं शिव जी अपना डमरू बजाना और विष्णु जी अपना चक्र चलाना भूल जाते हैं।
इस तरह भजन बताता है कि मोहन की बांसुरी की तान इतनी मोहक है कि वह देवताओं तक को अपने वश में कर लेती है — यह कृष्ण के संगीत और प्रेम की सर्वव्यापी शक्ति को दर्शाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन जन्माष्टमी और कृष्ण भजन-संध्या में गाया जाता है, जब भक्त कृष्ण की बांसुरी और उनके मोहक स्वरूप का गुणगान करते हैं।
रासलीला और कृष्ण-कीर्तन के सामूहिक आयोजनों में भी इसे भाव-विभोर होकर गाया जाता है।
इससे जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि कृष्ण की बांसुरी उन्हें स्वयं महादेव से प्राप्त हुई थी, जिसे उन्होंने सदैव अपने पास रखा और प्रेम-भक्ति फैलाने का माध्यम बनाया।
इसी तरह कृष्ण के मुकुट में सजा मोरपंख भी राधा के प्रेम का प्रतीक माना जाता है — कथा है कि एक बार कृष्ण की बांसुरी की धुन पर राधा नाचने लगीं तो मोर भी मगन होकर नाचने लगे, और नृत्य के बीच एक मोरपंख गिर पड़ा, जिसे कृष्ण ने राधा की स्मृति के रूप में अपने मस्तक पर सजा लिया।
भजन के बोल
कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे
कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे
जब से बांसुरिया भोले जी ने सुन ली...
भूल गए डमरू बजाना ओ मोहन कैसी बजाई रे
कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे ...
जब से बांसुरिया विष्णु जी ने सुन ली
भूल गए चक्र चलना ओ मोहन कैसी बजाई रे
कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे ....
जब से बांसुरिया ब्रह्मा जी ने सुन ली
भूल गए सृष्टि रचना ओ मोहन कैसी बजाई रे
कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे ....
जब से बांसुरिया राम जी ने सुन ली
हां जब से बासुरिया राम जी ने सुन ली
भूल गए धनुष चलाना ओ मोहन कैसी बजाई रे
कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे....
जब से बांसुरिया हनुमत जी ने सुन ली
हां जबसे बासुरिया हनुमत जी ने सुन ली
भूल गए गदा चलाना ओ मोहन कैसी बजाई रे
कैसी बजाई बांसुरिया वो मोहन कैसी बजाई रे ....
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