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अब न चराऊँ तेरी गैया यशोदा मैयाab na charau teri gaiya lyrics
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
इस पंक्ति में कृष्ण जी यशोदा मैया से जिद कर रहे हैं कि अब वे और अधिक वन में गाय चराने नहीं जाएंगे क्योंकि अब उनका बुलावा आ गया है , उन्हें मथुरा जाना है।
श्रीकृष्ण के ब्रज छोड़ने और मथुरा जाने का समय निकट आता है उस अगाध वेदना व बाल-लीला के उलाहने को व्यक्त किया है, जहाँ वे अपनी मैया से कहते हैं कि अब उनका मन यहाँ गाय चराने में नहीं लग रहा है।
भजन के बोल
अब न चराऊँ तेरी गैया यशोदा मैया,मथुरा मैं जाऊँ। अब न चराऊँ तेरी गैया यशोदा मैया,मथुरा मैं जाऊँ।
घास सूख गई तेरे मधुवन की, पतझड़ हुई छँया कदमन की, सूखे हैं ताल-तलैयाँ यशोदा मैया, अब न चराऊँ तेरी गैया यशोदा मैया,मथुरा मैं जाऊँ।
ब्रज की गोपी मोहे सतावें, घर ले जाइके नाच नचावें, नाचूँ मैं ता-ता थेया यशोदा मैया, अब न चराऊँ तेरी गैया यशोदा मैया,मथुरा मैं जाऊँ।
तू भी आके लाड़ लड़ावे, कन्हैया कह के मोहे बुलावे, यूँ बलदाऊ भैया यशोदा मैया, अब न चराऊँ तेरी गैया यशोदा मैया,मथुरा मैं जाऊँ।
महिमा अधिक जाकी पार ना पावे, राम कृष्ण मैया को रिझावे, नटखट कृष्ण कन्हैया यशोदा मैया, अब न चराऊँ तेरी गैया यशोदा मैया,मथुरा मैं जाऊँ।
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