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जिस भजन में राम का नाम ना हो Lyrics | Jis Bhajan Mein Ram Ka Naam Na Ho
राम भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन भगवान श्रीराम को समर्पित है। इसमें राम-नाम की महिमा के साथ-साथ परिवार, माता-पिता और रिश्तों से जुड़े जीवन-मूल्यों की सीख दी गई है। भजन का मुख्य भाव है कि मनुष्य के जीवन और भक्ति में भगवान का स्मरण तथा मर्यादित आचरण दोनों महत्वपूर्ण हैं।
पहले अंतरे में संतान के प्रति प्रेम रखते हुए भी उसे अत्यधिक लाड़-प्यार देकर अनुशासनहीन न बनाने की सीख दी गई है। दूसरे अंतरे में माता-पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश है—जिन्होंने जन्म दिया और पालन-पोषण किया, उनका मन नहीं दुखाना चाहिए। तीसरे अंतरे में पारिवारिक संबंधों में समझदारी और विवेक बनाए रखने की बात कही गई है। हर अंतरे के बाद आने वाली पंक्ति “जिस भजन में राम का नाम ना हो, उस भजन को गाना ना चाहिए” राम-नाम की महत्ता को दोहराती है और पूरे भजन को भक्ति से जोड़ती है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन राम भजन, सत्संग, कीर्तन, भजन संध्या और घर में होने वाली धार्मिक पूजा के समय गाया जा सकता है। राम नवमी, रामायण या रामचरितमानस पाठ तथा भगवान श्रीराम से जुड़े धार्मिक आयोजनों में भी यह उपयुक्त है। इसे केवल किसी विशेष त्योहार तक सीमित नहीं माना जाता; सामान्य भक्ति के समय भी राम-नाम के स्मरण और परिवार में अच्छे संस्कारों का संदेश देने के लिए गाया जा सकता है।
भजन के बोल
जिस भजन में राम का नाम ना हो,
उस भजन को गाना ना चाहिए॥
चाहे बेटा कितना प्यारा हो,
उसे सिर पे चढ़ाना ना चाहिए।
चाहे बेटी कितनी लाडली हो,
घर-घर में घुमाना ना चाहिए।
जिस भजन में राम का नाम ना हो,
उस भजन को गाना ना चाहिए॥
जिस माँ ने हम को जन्म दिया,
दिल उसका दुखाना ना चाहिए।
जिस पिता ने हम को पाला है,
उसे कभी रुलाना ना चाहिए।
जिस भजन में राम का नाम ना हो,
उस भजन को गाना ना चाहिए॥
चाहे पत्नी कितनी प्यारी हो,
उसे भेद बताना ना चाहिए।
चाहे भाई कितना ही बैरी हो,
उसे राज छुपाना ना चाहिए।
जिस भजन में राम का नाम ना हो,
उस भजन को गाना ना चाहिए॥
जिस भजन में राम का नाम ना हो,
उस भजन को गाना ना चाहिए॥
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