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मेरे राम, दया के सागर हैं || Mere Ram Daya Ke Sagar Hai Bhajan Lyrics
Ram Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में भक्त राम से कहता है कि वे दया के सागर हैं पर जब उसकी बिगड़ी बनाएँ तब जाने। त्रेता, द्वापर में आए — पर कलयुग में आओ तब जाने। अयोध्या, मथुरा में आए — पर मेरे घर आओ तब जाने। मंदिर, मूर्ति, दशरथ घर, पूजा-आरती में आए — पर मेरे दिल में आओ और मेरे कीर्तन में आओ तब जाने। यह भजन भक्त की प्रत्यक्ष अनुभव की तड़प को व्यक्त करता है।
भजन के बोल
मेरे राम, दया के सागर हैं,
मेरी विगड़ी बनाओ, तो जाने
त्रेता में आए, तो क्या आए,
द्वापर में आए, तो क्या आए
कल्युग में आओ, तो जाने,
मेरी विगड़ी बनाओ, तो जाने
मेरे राम, दया के,,,,,,,,,,,,,,,
अयोधिया में आए, तो क्या आए,
मथुरा में आए, तो क्या आए
मेरे घर में आओ, तो जाने,
मेरी विगड़ी बनाओ, तो जाने
मेरे राम, दया के,,,,,,,,,,,,,,,
मंदिर में आए, तो क्या आए,
मूर्त में आए, तो क्या आए
मेरे दिल में आओ, तो जाने,
मेरी विगड़ी बनाओ, तो जाने
मेरे राम, दया के,,,,,,,,,,,,,,,
दशरथ घर आए, तो क्या आए,
यशोधा घर आए, तो क्या आए
मेरे घर आओ, तो जाने,
मेरी विगड़ी बनाओ, तो जाने
मेरे राम, दया के,,,,,,,,,,,,,,,
पूजा में आए, तो क्या आए,
आरती में आए, तो क्या आए
मेरे कीर्तन आओ, तो जाने,
मेरी विगड़ी बनाओ, तो जाने
मेरे राम, दया के,,,,,,,,,,,,,,,