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मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम Meri Naiya Mein Laxman Ram Ganga Maiya Dhire Baho
Ram Bhajan
भजन का अर्थ
यह भजन भगीरथ की गंगा और केवट की नाव में लक्ष्मण और राम के विराजने का वर्णन करता है। गंगा पाप हरती है, नाव पार कराती है और भक्त हित राम आते हैं। केवट ने भगीरथ की गंगा में राम-लक्ष्मण को पार उतारा — यह पल धन्य था। यह भजन गंगा की पवित्रता, केवट की भक्ति और राम के प्रति समर्पण का सुंदर वर्णन है।
भजन के बोल
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
कौन की है नैय्या कौन की है गंगा
और कौन के है लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
मेरे नैय्या में लक्ष्मण राम
हे गंगा मैय्या धीरे बहो।।
केवट की नैय्या भागीरथ की गंगा
ओ केवट की नैय्या भागीरथ की गंगा।।
राजा दशरथ के लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
कहे आई नैय्या कहे आई गंगा
कहे आए हैं लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
राम चंद्र भगवान की जय हो
जय श्री राम जय जय राम।।
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
हे गंगा मैय्या धीरे बहो।।
पार करे नैय्या पाप हरे गंगा
भक्त हित आए लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।