"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम || Meri Naiya Mein Lakshman Ram Ganga Maiya Dhire Baho Lyrics
राम भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 20 जनवरी 2024
भजन का अर्थ
भजन में भागीरथ की तपस्या से धरती पर आई गंगा और केवट की छोटी सी नाव में राजा दशरथ के पुत्र राम-लक्ष्मण के विराजने का वर्णन है।
गंगा से धीरे बहने का प्रेमपूर्ण अनुरोध किया गया है, ताकि भक्तों के पाप हरने वाली और भक्त-हित में आए राम को लेकर यह पुण्य नाव कुशलता से पार लगे।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन गंगा आरती, गंगा दशहरा और राम वनगमन प्रसंग से जुड़े भजन-कीर्तन में गाया जाता है, विशेषकर जहाँ केवट-प्रसंग का स्मरण किया जाता है।
इससे जुड़ी मान्यता
यह भजन उस प्रसंग पर आधारित है जब वनवास को जाते समय राम, सीता और लक्ष्मण को केवट ने अपनी नाव में गंगा पार कराई थी। कथा के अनुसार केवट ने राम के चरण धोकर ही उन्हें नाव में बिठाया था, जो भक्त और भगवान के आत्मीय संबंध का प्रतीक माना जाता है।
यह भजन "Meri Naiya Me Laxman Ram" नाम से भी खोजा जाता है।भजन के बोल
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
कौन की है नैय्या कौन की है गंगा
और कौन के है लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
मेरे नैय्या में लक्ष्मण राम
हे गंगा मैय्या धीरे बहो।।
केवट की नैय्या भागीरथ की गंगा
ओ केवट की नैय्या भागीरथ की गंगा।।
राजा दशरथ के लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
कहे आई नैय्या कहे आई गंगा
कहे आए हैं लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
राम चंद्र भगवान की जय हो
जय श्री राम जय जय राम।।
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
हे गंगा मैय्या धीरे बहो।।
पार करे नैय्या पाप हरे गंगा
भक्त हित आए लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
मेरी नैय्या में लक्ष्मण राम
ओ गंगा मैय्या धीरे बहो।।
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए






