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श्री राम चंद्र कृपालु भजमन || Shri Ram Chandra Kripalu Lyrics in Hindi
राम भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 11 अप्रैल 2026
भजन का अर्थ
यह भजन भगवान श्रीराम के दिव्य रूप, करुणा और वीरता का वर्णन करता है - कमल जैसे नेत्र-मुख-चरण, नील बादल सा सुंदर वर्ण, और दीनबंधु स्वरूप में उनकी स्तुति की गई है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन रामनवमी, राम भजन-कीर्तन और प्रातःकालीन पूजा में गाया जाता है।
इससे जुड़ी मान्यता
यह भजन गोस्वामी तुलसीदास रचित है और रामचरितमानस से जुड़ी परंपरा का भाग माना जाता है, जिसे भक्त प्रतिदिन प्रातः स्मरण के रूप में गाते हैं।
भजन के बोल
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥
शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं ॥५॥
मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो ॥६॥
एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥
॥सोरठा॥
जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम अङ्ग फरकन लगे।
बोलो सियावर रामचंद्र की जय। पवन सुत हनुमान की जय॥
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