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शंकर तेरी जटा में | भोले बाबा तेरी जटा में || Shankar teri jata me behti hai ganga dhara Bhajan Lyrics
शिव भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 7 सितंबर 2025
भजन का अर्थ
यह भजन शिव जी की जटाओं से बहती गंगा धारा, गले में मुंडमाल, माथे पर चंद्रमा, हाथ में डमरू-त्रिशूल और वृषभ की सवारी के दिव्य स्वरूप का काव्यमय वर्णन करता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन सावन सोमवार, शिवरात्रि और शिव पूजा के अवसरों पर गाया जाता है।
भजन के बोल
शंकर तेरी जटा में, भोले बाबा तेरी जटा में, बहती है गंग धारा,
काली घटा के अंदर, जिमि दामिनी उजाला,
शंकर तेरी जटा में, भोले बाबा तेरी जटा में, बहती है गंग धारा |
गले में मुंडमाल राजै, शशि भाल पर विराजै,
डमरुँ निनाद बाजै,कर में त्रिशूल धारा,
शंकर तेरी जटा में, भोले बाबा तेरी जटा में, बहती है गंग धारा |
मृग चर्म बसन धारी, वृषराज पै सवारी,
निज भक्त दू:खहारी, कैलाश में बिहारा,
शंकर तेरी जटा में, भोले बाबा तेरी जटा में, बहती है गंग धारा |
दृग तीनि तेजरासी, कटिबन्ध नाग फाँसी,
गिरजा हैं संग दासी,सब विश्व के अधारा,
शंकर तेरी जटा में, भोले बाबा तेरी जटा में, बहती है गंग धारा |
शिव नाम जो उचारें,सब पाप दोष टारे,
ब्रह्मानंद ना बिसारे,भव सिन्धु पार तारा,
शंकर तेरी जटा में, भोले बाबा तेरी जटा में, बहती है गंग धारा |
शंकर तेरी जटा में, भोले बाबा तेरी जटा में,
बहती है गंग धारा, काली घटा के अंदर,
जिमि दामिनी उजाला, शंकर तेरी जटा में, बहती है गंग धारा |
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