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पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा || Mahashivratri special Parvat pe damru bajave bhole baba
Shiv Bhajan
भजन का अर्थ
यह महाशिवरात्रि भजन भोले बाबा के पर्वत पर डमरू बजाने पर ब्रह्मा, विष्णु, नारद, गणपति, कार्तिक, नंदी, ऋषि-मुनि और समस्त सृष्टि के नाचने का वर्णन करता है। भूत-प्रेत भी नाचते हैं और नर-नार सभी झूम उठते हैं। भोले अपनी ही धुन में मगन हैं और सारी सृष्टि को नचाते हैं। यह भजन भोलेनाथ की अनंत शक्ति और उनके संगीत के सार्वभौमिक प्रभाव को दर्शाता है।
भजन के बोल
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा,
बजावे भोले बाबा बजावे भोले बाबा...
डमरू की धुन सुन ब्रह्मा जी आए,
नारद मुनि को नचावे भोले बाबा,
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....
डमरू की धून सुन विष्णु जी आए,
सारे देवो को नचावे भोले बाबा,
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....
गणपति नाचे कार्तिक नाचे,
नंदी को संग में नचावे भोले बाबा,
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....
ऋंगी भींगी श्रृंगी नाचे,
ऋषि मुनियों को नचावे भोले बाबा,
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....
नर और नार सभी है नाचे,
भूतो और प्रेतों को नचावे भोले बाबा,
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा....
अपनी ही धुन में भोले मगन है,
सारी सृष्टि को नचावे भोले बाबा,
पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....