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जय भोले भंडारी बाबा Jai Bhole Bhandari Baba
Shiv Bhajan
भजन का अर्थ
यह भजन भोलेनाथ की महिमा का गुणगान करते हुए पूछता है कि गंगा, चंदा, बिच्छू, नाग, डमरू, गौरा, गणपति, घुंघरू और नंदी ने ऐसा क्या पुण्य किया कि भोले ने उन्हें जटा, माथे, कानों, गले, हाथों, बाएँ, गोद, पैरों और सामने स्थान दिया। यह भजन शिव के अंग-प्रत्यंग से जुड़ी वस्तुओं की महिमा और भक्त की जिज्ञासा को व्यक्त करता है।
भजन के बोल
जय भोले भंडारी बाबा, जय भोले भंडारी |
सारी दुनिया तारी बाबा,सारी दुनिया तारी बाबा | जय भोले भंडारी बाबा..........
ऐसा क्या करम गंगा मैया ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने जट्टा में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा...........
ऐसा क्या करम चंदा मामा ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने माथे पे दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम बिच्छू ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने कानो में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम नागो ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने गले में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम डमरू ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने हाथो में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम गौरा मैया ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने बाए में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम गणपति ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने गोदी में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम घुंघरू ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने पेरों में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम नंदी ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने सामने दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............
ऐसा क्या करम ने किया था |
उनको भी स्थान तुमने में दिया था | जय भोले भंडारी बाबा.............