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कितना प्यारा है नागो वाला हर भोले || Kitna pyara hai nago wala har bhole bhajan lyrics
शिव भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 21 जुलाई 2023
भजन का अर्थ
यह भजन भोलेनाथ के गले में विराजमान नाग-आभूषण की सुंदरता और महिमा का वर्णन करता है। भक्त कहता है कि भोले का यह "नागों वाला हर" कितना प्यारा है, जिसमें वे स्वयं मगन रहते हैं।
आगे भजन में गंगा, सरयू, गोमती जैसी पवित्र नदियों तथा सूरज, चाँद, तारों का उल्लेख करते हुए पूछा गया है कि उनमें ऐसा कौन सा बल है जिससे भोला बाबा मगन रहते हैं — यानी संपूर्ण सृष्टि ही शिव की महिमा में लीन है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन सावन के महीने, शिवरात्रि और सोमवार की शिव पूजा में गाया जाता है, जब भक्त शिव जी के आभूषणों और स्वरूप का स्मरण करते हैं।
नाग पंचमी के अवसर पर भी यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है, क्योंकि इसमें शिव और नाग के आपसी संबंध की महिमा है।
इससे जुड़ी मान्यता
लोक मान्यता के अनुसार जब ब्रह्मा जी के शाप से नागों को कष्ट हुआ, तो वे पुष्कर पर्वत पर गए और वहाँ कठोर तप किया। नागों की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भोले शंकर ने उन्हें अपने गले का आभूषण बना लिया।
इसी कथा के आधार पर शिव जी को नागों का स्वामी और रक्षक माना जाता है, और नाग पंचमी के दिन नागदेवता के साथ शिव जी की भी पूजा की जाती है।
भजन के बोल
कितना प्यारा है नागो वाला हार भोले |
तेरे हारो पे जाऊ बलिहार भोले ||
तेरी गंगा ने धरम कमा लिया |
तूने जटा में उसको समा लिया ||
कितना प्यारा है नागो वाला हार भोले |
तेरे गंगा पे जाऊ बलिहार भोले ||
तेरे चंदा ने धरम कमा लिया |
तूने माथे में उसको सजा लिया ||
कितना प्यारा है नागो वाला हार भोले |
तेरे चंदा पे जाऊ बलिहार भोले ||
तेरे सर्पो ने धरम कमा लिया |
जिन्हें भोले ने गले में समा लिया ||
कितना प्यारा है नागो वाला हार भोले |
तेरे सर्पो पे जाऊ बलिहार भोले ||
उस भस्म ने धरम कमा लिया |
उसे भोले ने तन पे रमा लिया ||
कितना प्यारा है नागो वाला हार भोले |
तेरे भस्म पे जाऊ बलिहार भोले ||
गौरा मैया ने धरम कमा लिया |
जिन्हें भोले ने अपना बना लिया ||
कितना प्यारा है नागो वाला हार भोले |
उन मैया पे जाऊ बलिहार भोले ||
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए





