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अलख निरंजन सब दुःख भंजन || Shankar Bholenaath sab dukh dur karo Bhajan Lyrics
शिव भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन भोलेनाथ से समस्त दुखों को दूर करने की प्रार्थना है। इसमें शिव जी के संपूर्ण स्वरूप का वर्णन है — हाथों में डमरू, पैरों में घुँघरू, नंदी की सवारी, साथ में गौरा और गोद में गणपति।
भजन में उन्हें घट-घट वासी और कैलाशवासी कहकर विनती की जाती है कि वे भक्तों का बेड़ा पार लगाएँ, अर्थात जीवन की सभी कठिनाइयों से मुक्ति दें।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन सावन के महीने, शिवरात्रि, और सोमवार के शिव पूजन में गाया जाता है, जब भक्त शिव मंदिरों में जलाभिषेक और आरती करते हैं।
कांवड़ यात्रा और शिव जागरण जैसे भक्ति आयोजनों में भी यह भजन उत्साह और श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
भजन के बोल
अलख निरंजन सब दुःख भंजन,
शंकर भोलेनाथ सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
माथे पे चंदा जटाओ में गंगा,
गले सर्पो का हार सब दुख दूर करो,
भोले गले सर्पो का हार सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
कानों में कुंडल हाथ कमंडल,
पहने बागंबर छाल सब दुख दूर करो,
भोले पहने बागंबर छाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
हाथों में डमरू पैरों में घुघरू,
चले मस्तानी चाल सब दुख दूर करो,
भोले चले मस्तानी चाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
नंदी सवारी संग गौरा प्यारी,
अरे गोदी में गणपति लाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
घट घट वासी कैलाश वासी,
कर दो बेडा पार सब दुख दूर करो,
बाबा करो दो बेडा पार सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
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