"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"

अलख निरंजन सब दुःख भंजन || Shankar Bholenaath sab dukh dur karo Bhajan Lyrics
Shiv Bhajan
भजन का अर्थ
यह भजन भोलेनाथ से सभी दुःख दूर करने की प्रार्थना है। माथे पर चंदा, जटा में गंगा, गले में सर्पों का हार, कानों में कुंडल, हाथ में डमरू, पैरों में घुंघरू, नंदी की सवारी, गौरा के साथ और गोदी में गणपति — इस दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए कहते हैं कि घट-घट वासी कैलाशवासी बाबा बेड़ा पार करें। यह भजन भोलेनाथ के सम्पूर्ण स्वरूप की स्तुति है।
भजन के बोल
अलख निरंजन सब दुःख भंजन,
शंकर भोलेनाथ सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
माथे पे चंदा जटाओ में गंगा,
गले सर्पो का हार सब दुख दूर करो,
भोले गले सर्पो का हार सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
कानों में कुंडल हाथ कमंडल,
पहने बागंबर छाल सब दुख दूर करो,
भोले पहने बागंबर छाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
हाथों में डमरू पैरों में घुघरू,
चले मस्तानी चाल सब दुख दूर करो,
भोले चले मस्तानी चाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
नंदी सवारी संग गौरा प्यारी,
अरे गोदी में गणपति लाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....
घट घट वासी कैलाश वासी,
कर दो बेडा पार सब दुख दूर करो,
बाबा करो दो बेडा पार सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो....