मेरी बगिया की तुलसा ना तोड़ माली Patte Patte Pe Bethe Hai Banwari Tulsi Vivah Geet Lyrics
भजन का अर्थयह भजन तुलसी (तुलसा) मैया की महिमा और उनकी पवित्रता को दर्शाता है: पूरा अर्थ पढ़ें →
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 30 अक्टूबर 2026
भजन के बोल
मेरी बगिया की तुलसा ना तोड़ माली।
पत्ते पत्ते पे बैठे हैं बनवारी।।
तुलसा को देखन रामजी आए।
राम जी आए संग सीता जी को लाए।
सीता मैया को देख झुक गई डाली।।
पत्ते पत्ते पे बैठे हैं बनवारी....
तुलसा को देखने गणपति जी आए।
संग में अपने रिद्धि सिद्धि को लाए।
संग में अपने रिद्धि सिद्धि को लाए।
रिद्धि सिद्धि को देख झुक गई डाली।।
पत्ते पत्ते पे बैठे हैं बनवारी....
तुलसा को देखन ब्रह्मा जी आए।
संग में अपने सरस्वती जी को लाए।
सरस्वती जी को देख झुक गई डाली।।
पत्ते पत्ते पे बैठे हैं बनवारी....
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भजन का अर्थ
यह भजन तुलसी (तुलसा) मैया की महिमा और उनकी पवित्रता को दर्शाता है:
• मुख्य भाव: भक्त माली से प्रार्थना करता है कि बगीचे से तुलसी के पत्तों को मत तोड़ो, क्योंकि इसके हर एक पत्ते में स्वयं भगवान विष्णु (बनवारी) निवास करते हैं।
• देवताओं का आगमन: तुलसी जी की दिव्यता को देखने के लिए स्वयं भगवान राम (माता सीता के साथ), गणेश जी (रिद्धि-सिद्धि के साथ) और ब्रह्मा जी (माता सरस्वती के साथ) आते हैं।
• प्रकृति का आदर: जब भी ये दिव्य शक्तियाँ तुलसी जी के पास आती हैं, तो आदर और सम्मान में तुलसी की डाली अपने आप झुक जाती है।
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