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कंहवा पे बोलेला कोयलिया- Kahwa Pe Bolela Koyaliya Sohar Geet-Kajri
कृष्ण भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 3 सितंबर 2026
भजन का अर्थ
यह पारंपरिक सोहर गीत भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण और गोकुल-मथुरा में छाए आनंद के उत्सव को दर्शाता है। गीत की शुरुआत में एक सुंदर और कौतूहल भरा माहौल बनता है, जहाँ पूछा जाता है कि कोयल और मोर कहाँ चहक रहे हैं और किस भाग्यशाली महल में बच्चे के जन्म की बधाई (सोहर) गाई जा रही है। आगे इसका उत्तर मिलता है कि वृंदावन में कोयल कूक रही है, मथुरा में मोर बोल रहा है और गोकुल के महलों में खुशियों की गूंज है। फिर यह जिज्ञासा उठती है कि वह कौन सी गोद है जहाँ इस प्यारे बालक ने जन्म लिया है, जिससे हर तरफ बाजे बज रहे हैं। अंत में प्रकट होता है कि माता देवकी की पावन गोद में साक्षात प्रभु ने लल्ला के रूप में जन्म लिया है, जिससे पिता वासुदेव का मन असीम आनंद से भर गया है, और नंद बाबा के घर (गोकुल) में बधाई के सुंदर बाजे बज रहे हैं और पूरे महल में उत्सव का सोहर गूंज रहा है।
भजन के बोल
सोहर गीत
कंहवां पे बोलेला कोयलिया
त कंहवां पे मोर बोले हो
अरें हो कंहवां पे बोलेला सहरसवा
महलीया उठे सोहर हो
वृन्दावन में बोलेला कोयलिया
त मथुरा में मोर बोले हो
अरे हो गोकुल में बोलेला सहरसवा
महलीया उठे सोहर हो
कहि गोदी जनमे ललनवा
त कहि खुसी मनवा हो
कहिं घर बजेला बंजनवा
महलीया उठे सोहर हो
देवकीं गोदी जनमे ललनवा
त वसुदेव खुशी मनवा हो
अरे हो नन्द घर बजेला बंजनवा
महलीया उठे सोहर हो
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