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हरि ओम हरि ओम नारायणम लिरिक्स || Hari Om Hari Om Satyam Shivam Narayanam Bhajan Lyrics
शिव भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 24 जून 2023
भजन का अर्थ
यह भजन शिव और विष्णु के एक ही परमतत्व के दो रूप होने का भाव व्यक्त करता है। "हरि" शब्द विष्णु का वाचक है, और "ॐ" सृष्टि के आदि-अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है, इसलिए "हरि ॐ" उच्चारण करना ईश्वर के स्मरण और एकाग्रता का माध्यम माना जाता है।
भजन में शिव को कैलाशवासी त्रिशूलधारी और नंदी की सवारी करने वाले तथा विष्णु को वैकुंठवासी चक्रधारी और गरुड़ की सवारी करने वाले के रूप में साथ-साथ रखा गया है। पार्वती-पति और लक्ष्मी-पति कहकर दोनों देवों की समानता दिखाई गई है।
इस तरह भजन का संदेश है कि रूप, अस्त्र और सवारी भले अलग हों, पर शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं — दोनों एक ही सत्य के प्रकट रूप हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
"हरि ॐ" का उच्चारण परंपरागत रूप से शुभ कार्यों के आरंभ में, ध्यान और साधना में किया जाता है, इसलिए यह भजन भी पूजा या भजन-संध्या की शुरुआत में गाया जाता है।
यह भजन शिव-विष्णु दोनों की एक साथ स्तुति करता है, इसलिए इसे शिवरात्रि, सावन सोमवार तथा हरि-हर मिलन या सत्संग जैसे अवसरों पर भी गाया जाता है, जहाँ दोनों देवताओं के प्रति समान भक्ति भाव दिखाना होता है।
यह भजन "ओम शिव ओम शिव सत्यम शिवम" (Om Shiv Om Shiv Satyam Shivam) नाम से भी खोजा जाता है।भजन के बोल
हरि ॐ हरि ॐ सत्यम् शिवम् —-(2)
हरि ओम हरि ओम नारायणम
कैलाश वासी सत्यम् शिवम्
वैकुण्ठ वासी नारायणम
हरि ॐ हरि ॐ सत्यम् शिवम्
हरि ओम हरि ओम नारायणम
त्रिशूल धारी सत्यम् शिवम्
चक्रधारी नारायणम
हरि ॐ हरि ॐ सत्यम् शिवम्
हरि ओम हरि ओम नारायणम
पार्वती पति सत्यम् शिवम्
लक्ष्मी पति श्री नारायणम
हरि ॐ हरि ॐ सत्यम् शिवम्
हरि ओम हरि ओम नारायणम
नंदी सवारी सत्यम शिवम
गरुड़ सावरी नारायणम
हरि ॐ हरि ॐ सत्यम् शिवम्
हरि ओम हरि ओम नारायणम
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