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भोले टपके हमारी झोपड़िया, एक महल बना दो बढ़िया | Bhole Tapke Humari Jhopadiya Ek Mehal Bana Do Badhiya Lyrics
शिव भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन किसे समर्पित है और मुख्य भाव क्या है
यह भजन भगवान शिव को समर्पित है। इसमें भक्त भोलेनाथ से प्रेमपूर्वक अपनी छोटी झोपड़ी की परेशानियाँ बताते हुए एक अच्छा और सुरक्षित घर बनाने की विनती करता है।
भजन की पंक्तियों का मतलब
बारिश में झोपड़ी टपकने से भक्त की खटिया और कपड़े भीग जाते हैं।
घर की खराब स्थिति के कारण भोजन बनाने और भोलेनाथ को भोग लगाने में भी परेशानी होती है।
ठंडे पानी और ठंडी हवा के बीच जीवन कठिन होने की बात कही गई है।
परेशान होकर भक्त मायके जाने तक की बात मजाकिया अंदाज में कहता है।
अंत में भोलेनाथ से एक सुंदर और पक्का महल बनाने की प्रेमपूर्ण विनती की गई है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन शिव भक्ति, सत्संग और भजन-कीर्तन के अवसरों पर गाया जाता है।
इसमें भगवान शिव के प्रति अपनापन, सरल भक्ति और घरेलू जीवन की परेशानियों को हल्के-फुल्के अंदाज में व्यक्त किया गया है।
भजन के बोल
भोले टपके हमारी झोपड़िया,
एक महल बना दो बढ़िया,
कभी जाऊ इस ओर, कभी जाऊ उस ओर,
भोले बीच में भीगे मेरी खटिया,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके...
कैसे भोजन बनाऊ, कैसे तुमको खिलाऊं,
कैसे घोटू तुम्हारी भंगिया,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके...
यहां ठंडा ठंडा पानी, यहां ठंडी हवा,
कैसे बीते हमारी उमरिया,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके...
मैं तो चली जाऊं मायके, चाहे दुनिया अब देखे,
मैंने बांध ली सामान की गठरिया,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके....
मेरा भीगे है चोला, मेरी भीगी है साड़ी,
मेरी भीगी है आधी चुनरिया,
एक महल बना दो बढ़िया, भोले टपके..
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