"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"
भोले ले आए बारात नंदी पर चढ़ के || Bhole Le Aaye Baraat
शिव भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन भगवान शिव और माता गौरा (पार्वती) के विवाह प्रसंग को समर्पित है। इसमें भोलेनाथ के नंदी पर सवार होकर अपनी अनोखी बारात के साथ माता गौरा के द्वार पहुँचने का सुंदर वर्णन किया गया है। भजन में माता गौरा के श्रृंगार और भगवान शिव के वैरागी स्वरूप की तुलना बड़े भक्तिभाव से की गई है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन विशेष रूप से महाशिवरात्रि, शिव-पार्वती विवाह उत्सव और भगवान शिव से जुड़े धार्मिक आयोजनों में गाया जाता है। सावन के सोमवार, शिवरात्रि तथा शिव मंदिरों में होने वाले भजन-कीर्तन में भी इसे गाया जा सकता है। इसका उद्देश्य भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का आनंद लेते हुए उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करना है।
भजन के बोल
भोले ले आए बारात नंदी पर चढ़ के.......
भोले ले आए बारात नंदी पर चढ़ के.......
नंदी पर चढ़ के जी...... नंदी पर चढ़ के.....
गौरा के माथे पर टिका सजे हैं टिका सजे है....टिका सजे हैं....
भोले बाबा के माथे पर चंदा चमके......
गौरा के गले में हारो सजे हैं ....
हारो सजे हैं.....हारो सजे हैं....
भोले बाबा के गले में नाग चमके....
गौरा के हाथों में लाल लाल मेहंदी लाल लाल मेहंदी.....लाल लाल मेहंदी....
भोले बाबा के हाथों में डमरू चमके.....
गौरा रानी के अंगों पर लाल चुनरी लाल चुनरी .....लाल चुनरी....
भोले बाबा के तन पर भभूत चमके....
भोले ले आए बारात नंदी पर चढ़ के.....
नंदी पर चढ़ के नंदी पर चढ़ के...
भोले ले आए बारात नंदी पर चढ़ के.....
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए







