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मैया नवरात्रों में जब धरती पर आती है | Maiya Navratron Mein Jab Dharti Par Aati Hai Lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 13 अप्रैल 2024
भजन का अर्थ
यह भजन नवरात्रि के नौ दिनों को माँ के धरती पर आगमन की एक सुंदर यात्रा के रूप में वर्णित करता है - पहले दिनों में माँ भक्तों की सुध लेती हैं, बीच के दिनों में आसन लगाकर दर्शन देती हैं।
सातवें से नौवें दिन तक माँ अपने खजाने खोलकर दोनों हाथों से आशीर्वाद लुटाती हैं, और दसवें दिन विदाई के समय फिर आने का वादा करके जाती हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि के हर दिन, विशेषकर घट स्थापना और विसर्जन के समय गाया जाता है, जब भक्त नौ दिनों की भावनात्मक भक्ति-यात्रा का अनुभव करना चाहते हैं।
भजन के बोल
मैया नवरात्रों में जब धरती पर आती है,
किसको क्या देना है ये सोच के आती है,
पहले नवरात्रे मैं माँ सब की खबर लेती है,
दूजे नवरात्रे में अपने खाते में लिख लेती है,
तिजे नवरात्रे में बात आगे बढ़ती है,
मैया नवरात्रों में......
चौथे नवरात्रे में माँ आसन लगाती है,
पाचवे नवरात्रे में मैं आ गई बताती हैं,
छटवे नवरात्रे में सबको दर्शन करवाती है,
मैया नवरात्रों में......
सातवे नवरात्रे में खोल देती खजाने है,
आठवे नवरात्रे में लग जाती लुटाने है,
नोवी नवरात्रे में दोनो हाथो से लुटाती है,
मैया नवरात्रों में....
दसवे दिन माता की विदाई जब आती है,
सारे धरती के लोगो की आंखे भर आती है,
रामा फिर आउंगी वादा करके चली जाती है,
मैया नवरात्रों में जब धरती पर आती है,
किसको क्या देना है ये सोच के आती है |
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए



