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लांगुरिया ले चल माँ के द्वार | Languriya Le Chal Maa Ke Dwar Mata Rani Ke Bhajan With Lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन लांगुरिया (माँ के विशेष भक्त-रूप) से माँ शेरावाली के दरबार ले चलने का आग्रह करता है, जहाँ माँ सोलह श्रृंगार धारण किए विराजती हैं।
माथे का टीका, नथनी, कुंडल, कंगन, पायल और लहंगा - सब लाल रंग के वर्णित हैं, जो माँ के दिव्य सौंदर्य को उजागर करते हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि में, विशेषकर वैष्णो देवी और अन्य पर्वतीय शक्तिपीठों की यात्रा व जागरण में गाया जाता है।
इससे जुड़ी मान्यता
लांगुरिया को माँ वैष्णो देवी और शेरावाली माता की लोक-भक्ति परंपरा में एक विशेष भक्त-चरित्र माना जाता है, जो माता के दरबार तक का मार्ग दिखाने वाला सेवक कहलाता है। पहाड़ी शक्तिपीठों की यात्रा में लांगुरिया से जुड़े भजन विशेष श्रद्धा से गाए जाते हैं।
भजन के बोल
लांगुरिया ले चल माँ के द्वार, लांगुरिया ले चल माँ के द्वार (2)
जहाँ विराजे शेरोवाली, जहाँ विराजे शेरोवाली
कर सोलह श्रृंगार......., लांगुरिया ले चल माँ के द्वार (2)
मांग मैया के टीका सोहे, मांग मैया के टीका सोहे..........
बिंदीया का रंग लाल , लांगुरिया ले चल माँ के द्वार ||
नाक मैया के नथनी सोहे ,नाक मैया के नथनी सोहे ........
गजरे का रंग लाल, लांगुरिया ले चल माँ के द्वार ||
कान मैया के कुण्डल सोहे, कान मैया के कुण्डल सोहे.........
माला का रंग लाल, लांगुरिया ले चल माँ के द्वार ||
हाथ मैया के कंगन सोहे, हाथ मैया के कंगन सोहे..............
मेंहदी का रंग लाल, लांगुरिया ले चल माँ के द्वार ||
पैर मैया के पायल सोहे , पैर मैया के पायल सोहे..............
महावर का रंग लाल, लांगुरिया ले चल माँ के द्वार ||
अंग मैया के लहंगा सोहे , अंग मैया के लहंगा सोहे................
चुनरी का रंग लाल, लांगुरिया ले चल माँ के द्वार ||
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