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कांच ही बांस के बहंगिया || chhath puja || kanch hi bans ke bahangiya lyrics
छठ पूजा
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 10 अक्टूबर 2025
भजन का अर्थ
यह अत्यंत प्रसिद्ध छठ गीत बाँस की बहंगी में फल सजाकर छठी मैया के घाट तक पहुँचाने की परंपरा का वर्णन करता है, जिसमें पति और देवर के सहयोग से यह पवित्र बहंगी घाट तक पहुँचती है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत छठ पूजा के दौरान बहंगी सजाकर घाट ले जाते समय गाया जाता है, जो पारिवारिक सहयोग और श्रद्धा का प्रतीक है।
भजन के बोल
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय ---(2)
होई ना बलम जी कहरिया,
बहंगी घाटे पहुंचाय
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय ---(2)
बाट जे पूछेला बटोहिया,
बहंगी केकरा के जाय ---(2)
तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया,
बहंगी छठ मैया के जाय --- (2)
ओहरे जे बारी छठि मैया,
बहंगी उनका के जाय ---(2)
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय ---(2)
होई ना देवर जी कहरिया,
बहंगी घाटे पहुंचाय ---(2)
ऊंहवे जे बारि छठि मैया
बहंगी के उनके के जाय ---(2)
बाट जे पूछेला बटोहिया
बहंगी केकरा के जाय ---(2)
तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया
बहंगी छठ मैया के जाय ---(2)
ऊंहवे जे बारी छठि मैया
बहंगी उनका के जाय ---(2)
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