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छठ पूजा | मारबो रे सुगवा धनुख से || Marbo Re Sugwa Dhanukh Se | Chhath Puja Song
छठ पूजा
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 23 अक्टूबर 2025
भजन का अर्थ
इस प्रसिद्ध छठ गीत में फलों के पेड़ पर बैठे तोते को धनुष से मारने का वर्णन है, जिसकी मृत्यु पर उसकी संगिनी विरह में रोकर सूर्य देव से सहायता माँगती है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत छठ पूजा के पारंपरिक लोकगीतों में गाया जाता है, विशेषकर घाट पर या प्रसाद तैयार करते समय।
भजन के बोल
ऊ जे केरवा जे फरेला घबद से, ओह पर सुगा मेड़राए |
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरछाय |
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ||
ऊ जे नारियर जे फरेला घबद से, ओह पर सुगा मेड़राए |
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरछाय |
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ||
अमरुदवा जे फरेला घबद से, ओह पर सुगा मेड़राए |
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरछाय |
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ||
शरीफवा जे फरेला घबद से, ओह पर सुगा मेड़राए |
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरछाय |
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ||
ऊ जे सेववा जे फरेला घबद से, ओह पर सुगा मेड़राए |
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरछाय |
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ||
सभे फलवा जे फरेला घबद से, ओह पर सुगा मेड़राए |
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए |
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ||
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