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छठ पूजा गीत| केलवा के पात पर || Kelwa Ke Paat Par Lyrics
छठ पूजा
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 19 अक्टूबर 2025
भजन का अर्थ
यह प्रसिद्ध छठ गीत केले, अमरूद और नारियल के पत्तों पर उगते सूर्य के मनोहर दृश्य का वर्णन करता है, साथ ही व्रती से पूछा जाता है कि वह किसके लिए यह व्रत कर रही है - अपने बेटे, पति और बेटी के लिए।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत छठ पूजा के दौरान सूर्योदय के अर्घ्य के समय गाया जाता है, जो पारिवारिक स्नेह और सूर्य उपासना का संगम है।
भजन के बोल
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके झुके ---(2)
ए करेलु छठ बरतिया से झांके झुके ---(2)
हम तोसे पूछी बरतिया ऐ बरितया से केकरा लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ---(2)
हमरो जे बेटवा कवन ऐसन बेटवा से उनके लागी ---(2)
हे करेली छठ बरतिया से उनके लागी ---(2)
अमरुदिया के पात पर उगेलन सुरूज मल झांके झुके ---(2)
ए करेलु छठ बरतिया से झांके झुके ---(2)
हम तोसे पूछी बरतिया ए बरितिया से केकरा लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ---(2)
हमरो जे स्वामी कवन एसन स्वामी से उनके लागी ---(2)
ए करेली छठ बरतिया से उनके लागी ---(2)
नारियर के पात पर उगेलन सुरूजमल झांके झूके ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से झांके झूके ---(2)
हम तोसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ---(2)
हमरो जे बेटी कवन ऐसन बेटिया से उनके लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से उनके लागी ---(2)
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