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छठ पूजा गीत| केलवा के पात पर || Kelwa Ke Paat Par Lyrics
chhath puja
भजन का अर्थ
यह प्रसिद्ध छठ गीत केले के पत्ते पर उगते सूर्य को देखकर छठ व्रत की महिमा बताता है। व्रती से पूछा जाता है कि वह किसके लिए यह व्रत कर रही है और वह बताती है कि अपने बेटे, पति और बेटी के लिए। नारियल, अमरूद के पत्ते पर उगते सूर्य का दृश्य अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह भजन पारिवारिक प्रेम और सूर्य उपासना का सुंदर संगम है।
भजन के बोल
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके झुके ---(2)
ए करेलु छठ बरतिया से झांके झुके ---(2)
हम तोसे पूछी बरतिया ऐ बरितया से केकरा लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ---(2)
हमरो जे बेटवा कवन ऐसन बेटवा से उनके लागी ---(2)
हे करेली छठ बरतिया से उनके लागी ---(2)
अमरुदिया के पात पर उगेलन सुरूज मल झांके झुके ---(2)
ए करेलु छठ बरतिया से झांके झुके ---(2)
हम तोसे पूछी बरतिया ए बरितिया से केकरा लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ---(2)
हमरो जे स्वामी कवन एसन स्वामी से उनके लागी ---(2)
ए करेली छठ बरतिया से उनके लागी ---(2)
नारियर के पात पर उगेलन सुरूजमल झांके झूके ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से झांके झूके ---(2)
हम तोसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ---(2)
हमरो जे बेटी कवन ऐसन बेटिया से उनके लागी ---(2)
ए करेलू छठ बरतिया से उनके लागी ---(2)