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Sindur lal chadayo lyrics in hindi-शेंदूर लाल चढायो | Ganesh Chaturthi Bhajan | Ganpati Ji Ke Bhajan
गणेश भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 24 अगस्त 2025
भजन का अर्थ
यह मराठी परंपरा से आई गणपति की प्रसिद्ध आरती है, जिसमें गौरी-पुत्र गणपति को सिंदूर, गुड़-लड्डू और फूलों से पूजकर विद्या व सुख की प्रार्थना की जाती है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह आरती गणेश चतुर्थी और गणपति विसर्जन के समय, विशेषकर महाराष्ट्र की गणेशोत्सव परंपरा में गाई जाती है।
भजन के बोल
शेंदूर लाल चढायो अच्छा गजमुखको,
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरि हर को,
हाथ लिए गुड-लद्दु सांई सुरवर को,
महिमा कहे न जाय लागत हूं पद को ।
जय देव जय देव
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता,
जय देव जय देव ।
भावभगत से कोई शरणागत आवे,
संतति संपत्ति सबहि भरपूर पावे,
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे,
गोसावीनन्दन निशिदिन गुण गावे,
जय देव जय देव ।
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता,
जय देव जय देव ।
त्वमेव माता पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव,
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वम मम देव देव,
घालीन लोटांगण वंदीन चरण ,डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे ।
प्रेमें आलिंगीन आनंद पूजन ,भावे ओवाळिन म्हणे नामा ।।
कयें वाच मनसेन्द्रियैवा, बुद्धयात्मना व प्रकृतिस्वभावा,
करोमि यद्यत सकलं परस्मै, नारायणायेति समर्पयामि ।
अच्युत केशवम रामनारायणं, कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरी,
श्रीधरम माधवं गोपिकावल्लभं, जानकीनायकं रामचंद्रम भजे ।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे ।
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए


