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श्री गणेश आरती -Shri Ganesh Aarti | Jai Ganesh Deva | Ganpati Bhajan Song
गणेश भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 27 अगस्त 2025
भजन का अर्थ
यह गणेश जी की सर्वाधिक लोकप्रिय आरती है, जिसमें एकदंत, चार भुजाधारी, माथे पर सिंदूर और मूषक सवारी वाले गणपति की स्तुति है। वे अंधों को आँखें, कोढ़ियों को काया, निःसंतान को पुत्र और निर्धन को धन देने वाले बताए गए हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह आरती हर शुभ कार्य, पूजा और गणेश चतुर्थी के अवसर पर अनिवार्य रूप से गाई जाती है।
भजन के बोल
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जा-की पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥ जय गणेश ...........
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
सूर- श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ जय गणेश ..........
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
--ॐ गं गणपतये नम:। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥---
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