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लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में Lal Phoolon Ki Ayyi Hai Bahar Maiya Tere Mandir Mein
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन माँ के मंदिर में फूलों की बहार आने के उत्सवी दृश्य से शुरू होता है, जहाँ स्वयं गणपति जी मूषक की सवारी करते हुए रिद्धि-सिद्धि सहित फूल चढ़ाने आते हैं।
आगे ब्रह्मा जी भी ब्रह्माणी सहित फूल चढ़ाने पहुँचते हैं — इस तरह भजन यह भाव दर्शाता है कि माँ के दरबार में सभी देवी-देवता स्वयं अपने परिवार सहित पधारकर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि और देवी मंदिरों में होने वाले भजन-कीर्तन में गाया जाता है, विशेषकर जब मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और भक्त सामूहिक रूप से माँ की स्तुति करते हैं।
घरेलू माता पूजा और जागरण में भी इसे भक्त उत्साह से गाते हैं।
भजन के बोल
लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में.....
फुल चढ़ाने को गणपति आए,
संग में अपने रिद्धि सिद्धि लाए,
होके मूषक सवार मैया तेरे मंदिर में,
लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में.....
फुल चढाने को ब्रम्हा जी आए,
संग में अपने ब्रम्हाणी को लाए,
होक हंस सवार मैया तेरे मंदिर में,
लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में.....
फुल चढ़ाने को विष्णु जी आए,
संग में अपने लक्ष्मी को लाए,
हो के गरुड़ सवार मैया तेरे मंदिर में,
लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में.....
फुल चढ़ाने को शंकर जी आए,
संग में अपने गौरा माँ को लाए,
होके बैल सवार मैया तेरे मंदिर में,
लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में.....
फुल चढाने को राम जी आए,
संग में अपने सीता माँ को लाए,
होके रथ पे सवार मैया तेरे मंदिर में,
लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में.....
फुल चढाने को कान्हा जी आए,
संग में अपने राधा को लाए,
होक मोर सवार मैया तेरे मंदिर में,
लाल फूलों की आई है बहार मैया तेरे मंदिर में....
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