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बैकुंठ बसैया गिरधारी क्यू आना जाना भूल गए | Vaikunth basaiya girdhari kyu aana jana bhul gaye lyrics
Krishna Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में भक्त बैकुंठ में बसे गिरधारी से पूछते हैं कि वे आना-जाना क्यों भूल गए। माँ यशोदा, गैया, ग्वाले, सखियाँ और भक्त सब रो-रोकर पुकार रहे हैं। माँ चाहती हैं कि आकर लाड़ लड़ाएँ, गैया घास खिलाएँ, ग्वाले खेल खिलाएँ और सखियाँ रास रचाएँ। यह भजन गोकुल की आत्मा और कृष्ण के बिना वहाँ के सूनेपन को मार्मिक रूप से व्यक्त करता है।
भजन के बोल
बैकुंठ बसैया गिरधारी क्यू आना जाना भूल गए |
बैकुंठ बसैया गिरधारी क्यू आना जाना भूल गए |
ये मैया तुम्हें पुकार रही, रो रो के रूदन मचाय रही.........
आकार के लाड लडा जाओ , क्यू आना जाना भूल गए |
ये गैया तुम्हें पुकार रही, रो रो के रूदन मचाय रही.........
आकार के घास खिला जाओ , क्यू आना जाना भूल गए |
ये ग्वाले तुम्हें पुकार रहे, रो रो के रूदन मचाय रहे.........
आकार के खेल खिला जाओ , क्यू आना जाना भूल गए |
ये सखिया तुम्हें पुकार रही, रो रो के रूदन मचाय रही.........
आकार के रास रचा जाओ , क्यू आना जाना भूल गए |
ये भक्तन तुम्हें पुकार रही, गा गा के भजन सुनाए रही.........
आकार के दरस दिखा जाओ , क्यू आना जाना भूल गए |
बैकुंठ बसैया गिरधारी क्यू आना जाना भूल गए |.............