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गुरुवार श्री बृहस्पति देव की आरती || Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti Lyrics
Krishna Bhajan
भजन का अर्थ
यह गुरुवार की आरती बृहस्पति देव की स्तुति है जो पूर्ण परमात्मा और अंतर्यामी हैं। चरणामृत से पाप नष्ट होते हैं और वे सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं। जो तन-मन-धन अर्पण कर शरण में जाते हैं उनके द्वार वे स्वयं आते हैं। वे दीनदयाल, भव-बंधन हारी और संतों के सुखकारी हैं। यह आरती गुरुवार के व्रत में बृहस्पति देव की कृपा पाने के लिए गाई जाती है।
भजन के बोल
जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी |
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥
सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥
सब बोलो विष्णु भगवान की जय।
बोलो बृहस्पति देव भगवान की जय॥