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श्री शिव गंगा होली || Kumaoni holi || shiv ganga chali jag taran ko
Kumaoni Holi
भजन का अर्थ
यह कुमाऊंनी होली गीत शिवगंगा अर्थात गंगा के जगत को तारने की महिमा का वर्णन करता है। गंगा हरि के चरणों से निकली और भगीरथ की तपस्या से शिवजी की जटा में आई। गणपति, ब्रह्मा, विष्णु सभी जग में सिद्धि, सृष्टि और पालन के लिए गंगा की ओर आते हैं। यह गीत गंगा की पवित्रता और उसके सभी देवताओं को जोड़ने वाले स्वरूप का काव्यमय चित्रण है।
भजन के बोल
शिव गंग चली जग तारन को, शिवगंग भई जगतारन को
हर गंग चली जग तारन को
कोई कहै हरि चरणों से निकली
कोई कहे हरि नामन सौ शिव
साधु कहे हरि चरणों से निकली
संत कहै हरि नामन सौ शिव गंग चली
तपस्या करके भगीरथ लाऐ
तारन को परिवारन को शिव गंग चली
शिवगंग चली हरिद्वारन को
बाहर बरस में भगीरथ लाए
आकर शिवजी की जटा में बही शिव गंग
ऋद्धि सिद्धि लेकर गणपति आए
जग में सिद्धि करावन को शिव गंग चली
ब्रह्म लोक से ब्रह्मा जी आए
जग में सृष्टि रचावन को शिव गंग चली
पुष्प विमान चढ़ी विष्णु जा आए
जग तारन, जग पालन को शिव गंग चली .....