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झनकारो, झनकारो, झनकारो, गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो Gori Pyare Lage Tero Jhankaro
Kumaoni Holi
भजन का अर्थ
यह ब्रज होली गीत एक गोरी के पायल की झंकार की तारीफ करता है जो मथुरा के मतवाले को बहुत प्यारी लगती है। फागुन में सब रंगे हैं, सखियाँ होली खेल रही हैं और मोहन पिचकारी मार रहे हैं। घूंघट खोलकर गुलाल मलते हैं और बृज का यह बंजारापन अत्यंत सुहावना लगता है। यह गीत ब्रज की होली की उमंग और प्रेम-भाव का जीवंत चित्रण है।
भजन के बोल
झनकारो, झनकारो, झनकारो, गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
तुम हो बृज की सुन्दर नारी, मैं मथुरा को मतवारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
चुनरी चादर सभी रंगे हैं, फागुन ऐसो रंगवारों,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
सब सखियाँ मिल खेलें होरी, दिलवर को दिल है न्यारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
बृज मंडल सब धूम मचो है, खेलत सखियाँ रंग डारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
लपटी-झपटी के बंय्यों मरोरे, मारे मोहन पिचकारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
घूंघट खोल गुलाल मलत हैं, बृज को यो सब बंजारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
अपनी जगा में सबै महँणा, फागुन लागो बड़ो प्यारो
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........