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झनकारो, झनकारो, झनकारो, गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो Gori Pyare Lage Tero Jhankaro
कुमाऊँनी होली
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 7 फ़रवरी 2025
भजन का अर्थ
यह ब्रज होली गीत एक गोरी के पायल की मधुर झंकार की तारीफ करता है, जो मथुरा के मतवाले कृष्ण को अत्यंत प्रिय लगती है।
फागुन में रंगी चुनरी, सखियों की होली और मोहन की पिचकारी का सुंदर चित्रण इस गीत में मिलता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत होली के अवसर पर, विशेषकर ब्रज-मथुरा शैली की होली गायकी और बैठकी होली में गाया जाता है।
भजन के बोल
झनकारो, झनकारो, झनकारो, गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
तुम हो बृज की सुन्दर नारी, मैं मथुरा को मतवारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
चुनरी चादर सभी रंगे हैं, फागुन ऐसो रंगवारों,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
सब सखियाँ मिल खेलें होरी, दिलवर को दिल है न्यारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
बृज मंडल सब धूम मचो है, खेलत सखियाँ रंग डारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
लपटी-झपटी के बंय्यों मरोरे, मारे मोहन पिचकारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
घूंघट खोल गुलाल मलत हैं, बृज को यो सब बंजारो,
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
अपनी जगा में सबै महँणा, फागुन लागो बड़ो प्यारो
गोरी प्यारो लागे तेरो झनकारो..........
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