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जल कैसे भरूँ जमुना गहरी || Jal kaise bharu jamuna gehri Kumaoni famous holi geet
Kumaoni Holi
भजन का अर्थ
यह प्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत एक महिला की यमुना किनारे जल भरने की दुविधा को दर्शाता है। खड़े होकर भरे तो राम जी देखेंगे, बैठकर भरे तो चुनरी भीगेगी। धीरे चले तो घर में सास बुरी है, तेज चले तो गगरी छलकेगी। गोद में बालक और सिर पर गागर लिए पर्वत से उतरी गोरी की यह मनोरंजक दुविधा होली के माहौल में गाई जाती है।
भजन के बोल
प्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत :-
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी।
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे,
ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे।
बैठी भरूँ भीजे चुनरी…
जल कैसे भरू जमुना गहरी।
बैठी भरूँ भीजे चुनरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
धीरे चलूँ घर सास बुरी है,
धीरे चलू घर सास बुरी है।
धमकि चलूँ छलके गगरी….
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
धमकि चलूँ छलके गगरी….
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी।
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
गोदी पर बालक, सिर पर गागर,
हे गोदी पर बालक, सिर पर गागर।
पर्वत से उतरी गोरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
पर्वत से उतरी गोरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥