"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी || Jal kaise bharu jamuna gehri Kumaoni famous holi geet
कुमाऊँनी होली
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह प्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत एक नवविवाहिता स्त्री की मीठी दुविधा का वर्णन करता है - खड़े होकर जल भरे तो राजा राम देख लेंगे, बैठकर भरे तो चुनर भीग जाएगी।
धीरे चले तो घर में सास सख्त है, तेज़ चले तो गागर छलक जाएगी - यह हास-परिहास शैली में स्त्री-जीवन की मार्मिकता और सहज संकोच को दर्शाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत उत्तराखंड की बैठकी होली और महिला-संगीत की महफिलों में गाया जाता है, विशेषकर होली के अवसर पर स्त्रियों की टोली द्वारा।
भजन के बोल
प्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत :-
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी।
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे,
ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे।
बैठी भरूँ भीजे चुनरी…
जल कैसे भरू जमुना गहरी।
बैठी भरूँ भीजे चुनरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
धीरे चलूँ घर सास बुरी है,
धीरे चलू घर सास बुरी है।
धमकि चलूँ छलके गगरी….
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
धमकि चलूँ छलके गगरी….
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी।
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
गोदी पर बालक, सिर पर गागर,
हे गोदी पर बालक, सिर पर गागर।
पर्वत से उतरी गोरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी,
पर्वत से उतरी गोरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए



