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श्री गंगा जी की होली Kumaoni holi shiv gang bhayi jag taran ko
Kumaoni Holi
भजन का अर्थ
यह कुमाऊंनी होली गीत शिवगंगा की महिमा को बूँद-बूँद के माध्यम से बताता है। पहली बूँद गणपति पर, दूसरी ब्रह्मा पर, तीसरी विष्णु पर, चौथी शिव पर, पाँचवीं राम पर, छठवीं कृष्ण पर और सातवीं बूँद दुर्गा पर पड़ी। हर बूँद से एक विशेष कार्य — सिद्धि, वेद, सृष्टि, संहार, असुर-नाश, रास और अटल सुहाग प्राप्त होता है। यह गीत गंगा के सर्वव्यापी पवित्र स्वरूप का अद्भुत वर्णन है।
भजन के बोल
शिव गंग भई जग तारन को
पहलों बूंद पड़ों गणपति पर ऋद्धि सिद्धि लावन को शिव गंग भई......
दूसरों बूँद पड़ों ब्रह्म जी पर
बेद को सार बखानन को। शिव गंग भई
तिसरों बूँद पड़ों विष्णु जी पर
पालन सृष्टि करावन को। शिव गंग भई .....
चौथों बूँद पड़ों शिव जी पर
सृष्टि संहार करावन को। शिवगंग भई .....
पाँचवों बूँद पड़ो राम जी पर
असुर संहार करावन को। शिव गंग भई .....
छव्वों बूँद पड़ों कृष्ण जी पर
ब्रज में रास रचावन को। शिव गंग भई .....
सातवों बूंद पड़ों दुर्गा पर
अटल सुहाग दिलावन को .....
शिव गंग भई जग तारन को .....