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ये गोटेदार चुनरी आजा माँ ओढ़ के, मेरे घर आजा माँ तू मंदिर को छोड़ के || Ye Gotedar Chunari Aja Maa Odh Ke Lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 29 दिसंबर 2023
भजन का अर्थ
यह भजन माँ से गोटेदार चुनरी ओढ़कर मंदिर छोड़ भक्त के घर आने का आग्रह करता है। भजन में बताया गया है कि राम, लक्ष्मण, सीता अपनी कुटिया छोड़कर तथा शंकर, गणपति, गौरा भी अपने धाम छोड़कर पहले ही भक्त के घर पधार चुके हैं।
इस तरह भजन यह भाव व्यक्त करता है कि जब सभी देवी-देवता भक्त के निमंत्रण पर घर आ सकते हैं, तो माँ भी अवश्य पधारेंगी — यह भक्त के घर को देवालय समान पवित्र मानने की भावना को दर्शाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि और घरेलू माता पूजन में गाया जाता है, विशेषकर जब भक्त माँ को अपने घर आमंत्रित करने की भावुक प्रार्थना करते हैं।
देवी जागरण और भजन-कीर्तन में भी इसे श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
भजन के बोल
ये गोटेदार चुनरी आजा माँ ओढ़ के,
मेरे घर आजा मैया मंदिर को छोड़ के।।
राम भी आए मैया लक्ष्मण भी आए है,
सीता भी आई मईया कुटिया को छोड़ के,
ये गोटेदार चुनड़ी आजा माँ ओढ़ के,
मेरे घर आजा मैया मंदिर को छोड़ के।।
शंकर भी आए मैया गणपति भी आएं,
गौरा भी आई मैया पर्वत को छोड़ के,
ये गोटेदार चुनरी आजा माँ ओढ़ के,
मेरे घर आजा मैया मंदिर को छोड़ के।।
राधा भी आई मईया रुक्मणि भी आई,
कृष्णा भी आए मैया द्वारिका को छोड़ के,
ये गोटेदार चुनड़ी आजा माँ ओढ़ के,
मेरे घर आजा मैया मंदिर को छोड़ के।।
ये गोटेदार चुनरी आजा माँ ओढ़ के,
मेरे घर आजा मैया मंदिर को छोड़ के।।
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