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तूने पानी में ज्योत जलाई रे लिरिक्स || Tune Pani Mein Jyot Jalaye Re Teri Jai Ho Jwala Mai Re Lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह भजन माँ ज्वाला देवी की महिमा का वर्णन करता है, जो पानी में भी अखंड ज्योति जलाए रखती हैं और 51 शक्तिपीठों में से एक की अधिष्ठात्री देवी हैं।
भजन बताता है कि सती ने राजा दक्ष की पुत्री रूप में जन्म लिया और शिव से विवाह किया, पर पिता के यज्ञ में बिना बुलाए जाने पर वहाँ शिव का अपमान हुआ। क्रोध और अपमान सहन न कर सती हवन कुंड में समा गईं। तब शिव क्रोधित होकर उनके शरीर को कंधे पर उठाकर घूमे, और जहाँ-जहाँ अंग गिरे वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ बने।
भजन के अनुसार जहाँ माता की जीभ गिरी वहाँ वे ज्वाला माई और जहाँ नयन गिरे वहाँ नैना देवी कहलाईं — यह पूरा भजन शक्तिपीठों की उत्पत्ति की मूल कथा को दर्शाता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि, देवी जागरण और ज्वाला माता (ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश स्थित शक्तिपीठ) की पूजा-आरती के समय गाया जाता है।
चूँकि यह भजन सीधे शक्तिपीठों की उत्पत्ति-कथा से जुड़ा है, इसे शक्तिपीठ यात्रा या दर्शन से पहले भी भक्तिभाव जगाने के लिए गाया जाता है।
इससे जुड़ी मान्यता
ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा मुगल बादशाह अकबर के समय की है। नादौन गाँव के परम भक्त ध्यानू, एक हजार यात्रियों के दल सहित ज्वाला माई के दर्शन के लिए जा रहे थे। दिल्ली के चांदनी चौक पर अकबर के सिपाहियों ने इतने बड़े दल को शक की नज़र से रोककर बादशाह के सामने पेश किया।
अकबर के पूछने पर ध्यानू ने बताया कि ज्वाला माता के मंदिर में बिना तेल या ईंधन के अखंड ज्योति सदा जलती रहती है, और माता ही समस्त संसार की पालनहार हैं। अकबर को इस पर विश्वास न हुआ, तो उसने परीक्षा के तौर पर ध्यानू के घोड़े का सिर काट दिया और कहा कि यदि माता में सच में शक्ति है तो वे इसे फिर से जोड़ दें।
ध्यानू माता के दरबार पहुँचे और श्रद्धा से घोड़े के कटे सिर को अर्पित करने का प्रयास किया, पर बात न बनती देख अंततः स्वयं अपना ही शीश काटकर माता को अर्पित कर दिया। इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर साक्षात् ज्वाला माता प्रकट हुईं और ध्यानू का सिर पुनः धड़ से जोड़कर उसे जीवित कर दिया, साथ ही घोड़े का सिर भी पूर्ववत जुड़ गया।
इसी घटना के बाद अकबर भी माता की शक्ति के आगे नतमस्तक हो गया, और तभी से ज्वाला देवी की अखंड ज्योति और ध्यानू भगत की भक्ति की यह कथा शक्तिपीठ यात्रा की सबसे प्रचलित कथाओं में गिनी जाती है।
यह भजन "तूने पानी में ज्योत जगाई रे" (Tune Pani Mein Jyot Jagai Re) नाम से भी खोजा जाता है।भजन के बोल
तूने पानी में ज्योत जगाई रे,
तेरी जय हो ज्वाला माई रे
तूने राजा दक्ष के जनम लिया
शिव शंकर के संग ब्याह किया
तू तो पार्वती कहलाई रे
तेरी जय हो ज्वाला माई रे
तूने पानी में ज्योत जगाई रे ---- (2)
तेरे पिता ने यज्ञ रचाया था,
और तुमको नही बुलाया था,
तू तो बिना बुलाये चली आयी रे,
तेरी जय हो ज्वाला माई रे
तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)
सब देवो का आव्हान हुआ
शिवशंकर का अपमान हुआ,
तू हवन कुंड में समायी रे,
तेरी जय हो ज्वाला माई रे,
तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)
शिव शंकर का जब क्रोध बढ़ा
भोलेबाबा का जब क्रोध बढ़ा
कांधे पे सती उठाई रे
तेरी जय हो ज्वाला माई रे
तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)
मैया जहाँ तुम्हारे अंग पड़े
मैया वहा वहा तेरे मंदिर बने
तू तो शक्ति पीठ कहलाई रे
तेरी जय हो ज्वाला माई रे
तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)
मैया जहा तुम्हारी जीभ गिरी
मैया जहा तुम्हारी जीभ गिरी
तू तो माँ ज्वाला कहलाई रे
तेरी जय हो ज्वाला माई रे
तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)
मैया जहा तुम्हारे नैन गिरे
मैया जहा तुम्हारे नैन गिरे
तू तो माँ नैना कहलाई रे
तूने पानी में ज्योत जगाई रे --- (2)
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