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रात रुको मैया सवेरे चली जाना || Raat ruko maiya savere chali jaana bhajan Lyrics
Mata Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में भक्त माँ से रात रुककर सवेरे जाने की विनती करती है क्योंकि अभी जी भरकर देखा नहीं है। सुनार से पायल, मालन से गजरा, दर्जी से चुनर, हलवाई से भोग, पंडित से वेद और भक्तों से भजन — सब लाना बाकी है। यह भजन माँ के विदाई के समय भक्त की आत्मा की पुकार और माँ को रोकने की प्रेमपूर्ण कोशिश को दर्शाता है।
भजन के बोल
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
अभी हमने जी भरके देखा नही है...
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं सुनार की दुकान पे,
अभी हमने पायल मंगाई नही है,
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
अभी हमने जी भरके देखा नही है....
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं मालन की दुकान पे,
अभी हमने गजरा मंगाया नही है,
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
अभी हमने जी भरके देखा नही है....
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं दर्जी की दुकान पे,
अभी हमने चुनर मंगाया नही है,
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
अभी हमने जी भरके देखा नही है...
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं हलवाई की दुकान पे,
अभी हमने भोग मंगाया नही है,
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
अभी हमने जी भरके देखा नही है...
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैया पंडित जी के घर में,
अभी हमने वेद सुनाया नही है,
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
अभी हमने जी भरके देखा नही है....
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैया भक्तों के घर में,
अभी हमने भजन सुनाया नही है,
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
अभी हमने जी भरके देखा नही है....