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पत्थर की मूरत बोल रही क्या मुझे मनाने आया है || Patthar ki murat bol padi kya mujhe manane aya hai Bhajan Lyrics
Mata Bhajan
भजन का अर्थ
इस अनूठे भजन में मंदिर की पत्थर की मूरत बोल पड़ती है और भक्त से पूछती है कि उसे मनाने क्यों आया। घर में माँ भूखी-प्यासी है, उसके कपड़े फटे हैं — पर भक्त मंदिर में छप्पन भोग और लाल चुनरी लाया है। माँ कहती है कि अपनी माँ को मना ले, उसकी सेवा कर — तेरे सारे कष्ट मिट जाएँगे। यह भजन ईश्वर भक्ति से पहले माता-पिता की सेवा का महत्वपूर्ण संदेश देता है।
भजन के बोल
इस नवरात्रि माता रानी का यह सुंदर भजन जरूर सुनें।
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी, क्या मुझे, मनाने आया है ll
तेरे घर में, मैया तड़प रही ll, क्या तुझे, तरस नहीं आया है ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी.........
तू छप्पन भोग ले आया है, घर में तेरी, मईया भूखी है,
दाने दाने को तरस रही है और मुझे खिलाने आया है
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........
तू जल का लोटा लाया है,तेरे घर में मैया प्यासी है,
वो तो बूंद बूंद को तरस रही है और मुझे पिलाने आया है|
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............
तेरी माँ के, कपड़े फ़टे हुए, एक साड़ी, तक ना लाया है ll
और मुझे, ओढ़ाने को बेटा ll, तूँ लाल, चुनरिया लाया है ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........
तेरी एक, झलक को पाने को, कब से तेरी, मईया तरस रही ll
मेरी एक, झलक ही पाने को ll, तूँ मीलों, चलकर आया है ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........
तूँ अपनी, माँ को मना लेना, सीने से, उसे लगा लेना ll
तेरे सारे, कष्ट ही मिट जाएंगे ll, क्यों मुझे, मनाने आया है ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............
सुन लो अब, दुनियाँ वालो तुम, अपने मात पिता की, सेवा करो ll
उस में ही, माँ दुर्गा बैठी ll, महाँ माया की, सब माया है ,
पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............