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कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी, भोले पैदल चले आ रहे है || Kitni Sunder Hai Maa Teri Nagari Bhajan Lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 13 अप्रैल 2024
भजन का अर्थ
यह भजन भोलेनाथ के पैदल माँ की नगरी की ओर चलने का सुंदर चित्रण करता है। जटा में गंगा, माथे पर चंद्रमा, कानों में बिच्छू, गले में नाग, हाथ में डमरू और बाघम्बर धारण किए भोले का पूरा शृंगार इस भजन में जीवंत हो उठता है।
साथ चलती गौरा मैया और नंदी की उपस्थिति इस दृश्य को और भी मनोहारी बना देती है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि और शिव-पार्वती दोनों की संयुक्त भक्ति के अवसरों पर, विशेषकर सावन और नवरात्रि के मेल के समय गाया जाता है।
भजन के बोल
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है……
उनकी जटा में गंगा विराजे,
वो बहाते चले आ रहे है,
उनके माथे पे चंदा विराजे,
वो चमकाते चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है….
उनके कानो में बिच्छु विराजे,
वो लटकाते चले आ रहे है,
उनके गले में नाग विराजे,
वो लहराते चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है…
उनके हाथो में डमरू विराजे ,
वो बजाते चले आ रहे है,
उनके अंगो में बाघम्बर छाला,
वो पहन कर चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है….
उनके पैरो में घुघरू विराजे,
वो बजाते चले आ रहे है,
उनके संग में गौर मैया सोहे,
जोड़ी बना कर चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है…..
उनके चरणों में नंदी विराजे,
वो घुमाते चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है……
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है……
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए



