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करेले से कड़वी हमारी ननदी | Karele Se Kadvi Hamari Nandi
बन्ना बन्नी गीत
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 4 जून 2024
गीत का अर्थ
यह गीत ननद के करेले जैसे कड़वे स्वभाव पर हास्यपूर्ण टिप्पणी करता है - भाभी चाहे साड़ी, कंगन, खीर या पायल कुछ भी उपहार लाए, ननद उसमें कोई न कोई कमी निकाल ही देती है।
यह गीत कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत विवाह की संगीत संध्या और घरेलू उत्सवों में हास्य-विनोद के लिए गाया जाता है, जो ननद-भाभी के मीठे रिश्ते को चुटीले अंदाज़ में दर्शाता है।
गीत के बोल
करेले से कड़वी हमारी ननदी ||
करेले से कड़वी हमारी ननदी ||
दीदी करेले से कड़वी हमारी ननदी ,
करेले से कड़वी हमारी ननदी ||
अपनी ननदिया को साड़ी ले आई
अपनी ननदिया को साड़ी ले आई
हां अपनी ननदिया को साड़ी ले आई ||
उसके नखरे हजार बतावे सस्ती
उसके नखरे हजार बतावे सस्ती
करेले से कड़वी हमारी ननदी ||
अपनी ननदिया को कंगन ले आई
अपनी ननदिया को कंगन ले आई
हा अपनी ननदिया को कंगन ले आई ||
उसके नखरे हजार बतावे नकली
उसके नखरे हजार बतावे नकली
करेले से कड़वी हमारी ननदी ||
खोया और मेवा की खीर बनाई
खोया और मेवा की खीर बनाई
हा खोया और मेवा की खीर बनाई ||
उसके नखरे हजार बतावे खट्टी
उसके नखरे हजार बतावे खट्टी
करेले से कड़वी हमारी ननदी ||
अपनी ननदिया को पायल ले आई
अपनी ननदिया को पायल ले आई
हा अपनी ननदिया को पायल ले आई ||
उनके नखरे हजार बतावे हलकी
उनके नकरे हजार बतावे हलकी
करेले से कड़वी हमारी ननदी ||
करेले से कड़वी हमारी ननदी .........हमारी ननदी
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