"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"
गली गली में फोन करो, बन्ने की बुआ भाग गई रे | Gali Gali Mein Phone Karo Banne Ki Bua Bhag Gayi Re Lyrics
बन्ना बन्नी गीत
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 15 मई 2026
गीत का अर्थ
यह हास्य विवाह गीत दूल्हे की महिला रिश्तेदारों - बुआ, मम्मी, चाची, बहना और मौसी - के साथ मज़ाकिया छेड़छाड़ करता है, जिसमें कहा जाता है कि वे महँगे गहने लेकर भाग गईं और अपने पतियों को बच्चों समेत अकेला छोड़ गईं।
यह गीत कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत विवाह की संगीत संध्या में मात्र मनोरंजन और हास्य के लिए गाया जाता है।
गीत के बोल
गली-गली में फोन करो, बन्ने की बुआ भग्ग गई रे!
बन्ने की बुआ भग्ग गई रे, बन्ने की बुआ भग्ग गई रे!
गली-गली में फोन करो...
एक लाख का टीका ले गई रे, सवा लाख की बिंदिया रे,
बालक-बच्चे हमें सोंप गई, फूफा रहा अकेला रे!
गली-गली में फोन करो...
गली-गली में फोन करो, बन्ने की मम्मी भग्ग गई रे!
एक लाख का झुमका ले गई रे, सवा लाख की नथनी रे,
बालक-बच्चे हमें सोंप गई, पापा रहा अकेला रे!
गली-गली में फोन करो...
गली-गली में फोन करो, बन्ने की चाची भग्ग गई रे!
एक लाख की तगड़ी ले गई रे, सवा लाख का गुच्छा रे,
बालक-बच्चे हमें सोंप गई, चाचा रहा अकेला रे!
गली-गली में फोन करो...
गली-गली में फोन करो, बन्ने की बहना भग्ग गई रे!
एक लाख का लहंगा ले गई रे, सवा लाख की चोली रे,
बालक-बच्चे हमें सोंप गई, जीजा रहा अकेला रे!
गली-गली में फोन करो...
गली-गली में फोन करो, बन्ने की मौसी भग्ग गई रे!
एक लाख का चूड़ा ले गई रे, सवा लाख की मुंदरी रे,
बालक-बच्चे हमें सोंप गई, मौसा रहा अकेला रे!
गली-गली में फोन करो...
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