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एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है || Ek haar bna maali sherawali ko pehnana hai lyrics
Mata Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में भक्त शेरावाली माँ के लिए हार बनाने और उन्हें पहनाने का संकल्प लेती है। पुजारी से मंदिर का पट खुलवाकर माँ को गंगाजल से नहलाना, रोली-तिलक लगाना, ज्योत जलाना, भेंट चढ़ाना, चुनरी ओढ़ाना और हलवा-पूरी का भोग लगाना है। यह भजन माँ की सेवा-पूजा की पूरी विधि को प्रेमपूर्वक वर्णित करता है।
भजन के बोल
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
हाथ में लोटा गंगा जल पानी। २
पट खोल पुजारी रेे, मुझे मैया को नहलाना है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
रोली चावल हाथ में लाई। २
पट खोल पुजारी रे, मां को तिलक लगाना है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
दिया बाती हाथ में लाई।२
पट खोल पुजारी रे, मां की जोत जलानी है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
ध्वजा नारियल हाथ में लाई। २
पट खोल पुजारी रे, मां को भेंट चढाना है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
लहंगा चुनरी हाथ में लाई। २
पट खोल पुजारी रे, मां को चुनरी उड़हानी है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
हलवा पूरी हाथ में लाई। २
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
पट खोल पुजारी रे, मां को भोग लगाना है।