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एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है || Ek haar bna maali sherawali ko pehnana hai lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 21 अक्टूबर 2023
भजन का अर्थ
यह भजन शेरावाली माँ (दुर्गा) के श्रृंगार की तैयारी में भक्त के प्रेम भाव को दर्शाता है। भक्त कहता है कि वह माली बनकर एक हार बनाएगा और शेरावाली को पहनाएगा, गंगाजल से माँ को स्नान कराएगा और रोली-चावल से तिलक लगाएगा।
यह भजन माँ की पूजा-विधि — स्नान, तिलक, श्रृंगार — को भक्ति और स्नेह के साथ चरण-दर-चरण प्रस्तुत करता है।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि में माँ दुर्गा (शेरावाली) की पूजा और श्रृंगार के समय गाया जाता है, विशेषकर जब पुजारी मंदिर के पट खोलकर माँ का श्रृंगार करते हैं।
देवी जागरण और भजन-कीर्तन में भी इसे भक्त श्रद्धा से गाते हैं।
भजन के बोल
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
हाथ में लोटा गंगा जल पानी। २
पट खोल पुजारी रेे, मुझे मैया को नहलाना है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
रोली चावल हाथ में लाई। २
पट खोल पुजारी रे, मां को तिलक लगाना है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
दिया बाती हाथ में लाई।२
पट खोल पुजारी रे, मां की जोत जलानी है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
ध्वजा नारियल हाथ में लाई। २
पट खोल पुजारी रे, मां को भेंट चढाना है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
लहंगा चुनरी हाथ में लाई। २
पट खोल पुजारी रे, मां को चुनरी उड़हानी है।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
हलवा पूरी हाथ में लाई। २
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है।
पट खोल पुजारी रे, मां को भोग लगाना है।
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