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भवन निराला माँ का शेर पीला पीला है Bhawan Nirala Maa Ka Sher Pila Pila Lyrics
Mata Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में माँ के भवन का वर्णन है जहाँ उनका शेर पीला-पीला है। गौरा, ब्रह्माणी, लक्ष्मी, सीता और राधा जी ने चुनरी ओढ़ी तो उनके पतियों का मन डोल गया। भोले का कमंडल, विष्णु का नागों वाला सिंहासन, राम का पीतांबर और कृष्ण का नीला पीतांबर — सब का वर्णन है। यह भजन सभी देवताओं के सौंदर्य और उनकी शक्तियों की एकता को प्रस्तुत करता है।
भजन के बोल
भवन निराला माँ का शेर पीला पीला है....
भवन निराला माँ का शेर पीला पीला है....
गौरा जी ने ओढ ली चुनरी शिवजी का मन डोला है
ऐसे डमरू वाले का कमंडल पीला पीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
ब्रह्माणी ने ओढ ली चुनरी ब्रह्मा का मन डोला है,
ऐसे शंकधारी का सिंहासन फूलों वाला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
लक्ष्मी जी ने ओढ ली चुनरी विष्णु का मन डोला है,
ऐसे चक्र धारी का सिंहासन नागो वाला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
गोरा जी ने ओढ ली चुनरी भोले का मन डोला है,
ऐसे डमरू धारी का कमंडल पीला पीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
सीता जी ने ओढ ली चुनरी रामा का मन डोला है,
ऐसे धनुषधारी का पीतांबर पीला पीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
राधा जी ने ओढ ली चुनरी कान्हा का मन डोला है,
ऐसे मुरली वाले का पीतांबर नीला नीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
मैया जी ने ओढ ली चुनरी भक्तों का मन डोला है,
ऐसी जग कल्याणी की सवारी पीली पीली है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....