"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"

भवन निराला माँ का शेर पीला पीला है Bhawan Nirala Maa Ka Sher Pila Pila Lyrics
माता भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 5 अक्टूबर 2024
भजन का अर्थ
यह भजन माँ के अनूठे भवन और उनके पीले शेर का काव्यमय वर्णन करते हुए बताता है कि गौरा, ब्रह्माणी, लक्ष्मी, सीता और राधा - जब भी इन देवियों ने चुनरी ओढ़ी, उनके पतियों शिव, ब्रह्मा, विष्णु, राम और कृष्ण का मन डोल गया।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह भजन नवरात्रि और माता के भजन-कीर्तन में गाया जाता है, जब सभी देवी-देवताओं की एकता और सौंदर्य का गुणगान करना हो।
भजन के बोल
भवन निराला माँ का शेर पीला पीला है....
भवन निराला माँ का शेर पीला पीला है....
गौरा जी ने ओढ ली चुनरी शिवजी का मन डोला है
ऐसे डमरू वाले का कमंडल पीला पीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
ब्रह्माणी ने ओढ ली चुनरी ब्रह्मा का मन डोला है,
ऐसे शंकधारी का सिंहासन फूलों वाला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
लक्ष्मी जी ने ओढ ली चुनरी विष्णु का मन डोला है,
ऐसे चक्र धारी का सिंहासन नागो वाला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
गोरा जी ने ओढ ली चुनरी भोले का मन डोला है,
ऐसे डमरू धारी का कमंडल पीला पीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
सीता जी ने ओढ ली चुनरी रामा का मन डोला है,
ऐसे धनुषधारी का पीतांबर पीला पीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
राधा जी ने ओढ ली चुनरी कान्हा का मन डोला है,
ऐसे मुरली वाले का पीतांबर नीला नीला है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
मैया जी ने ओढ ली चुनरी भक्तों का मन डोला है,
ऐसी जग कल्याणी की सवारी पीली पीली है,
भवन निराला मां का शेर पीला पीला है.....
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए


