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पांव में घुंघरु हाथों में कंगना आए गजानन गोरा जी के अंगना Paao Mai Ghungru Hatho Mai Kangna Aye Gajanan Gora Ji Ke Angna
Ganesh Bhajan
भजन का अर्थ
इस भजन में गणेश जी पाँव में घुंघरू और हाथों में कंगन लेकर गोरा जी के आँगन में आते हैं। गंगाजल से नहाते हैं, गौरा धीरे-धीरे पलना झुलाती हैं, भोले तिलक लगाते हैं, बेसन के लड्डू का भोग लगाया जाता है और ठंडे मटके का पानी पीते हैं। यह भजन शिव परिवार में बाल गणेश की लाड़-प्यार भरी सेवा का मनमोहक चित्रण है।
भजन के बोल
पांव में घुंघरु हाथों में कंगना आए गजानन गोरा जी के अंगना
पांव में घुंघरु हाथों में कंगना,
आए गजानन गोरा जी के अंगना
गंगाजल पानी सिला रे उबटन
नहाए गजानन शंकर जी के अंगना
धीरे धीरे गोरा झुलाय रही पलना
पांव में घुंघरु हाथों में कंगना,
आए गजानन गोरा जी के अंगना
पात पीतांबर ध्वजा धोती
पहने गजानन भोले जी के अंगना
धीरे धीरे गोरा झुलाय रही पलना
पांव में घुंघरु हाथों में कंगना
आए गजानन गोरा जी के अंगना
घिस घिस चंदन भरी रे कटोरी
तिलक लगाय रहे,भोले जी के अंगना
धीरे धीरे गोरा झुलाय रही पलना
पांव में घुंघरु हाथों में कंगना,
आए गजानन गोरा जी के अंगना
भर भर थाली बेसन के लड्डू
भोग लगाय रहे,भोले जी के अंगना
धीरे धीरे गोरा झुलाय रही पलना
पांव में घुंघरु हाथों में कंगना
आए गजानन गोरा जी के अंगना
कोरे कोरे मटके में ठंडा ठंडा पानी
पीवे गजानन,भोले जी के अंगना
धीरे धीरे गोरा झुलाय रही पलना
पांव में घुंघरु, हाथों में कंगना
आए गजानन गोरा जी के अंगना